दिल्ली-एनसीआर में मॉनसून की देरी और वर्तमान स्थिति
दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में इस बार मॉनसून की शुरुआत में सबसे अधिक देरी हो रही है, जो पिछले पांच वर्षों में सबसे लंबी प्रतीक्षा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अगले दो दिनों में मानसून के क्षेत्र में प्रवेश करने की संभावना जताई है। साथ ही, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के कुछ हिस्सों में वर्षा की संभावना भी व्यक्त की गई है।
मॉनसून का विस्तार और देशभर में बारिश का सिलसिला
बुधवार को उत्तर अरब सागर, गुजरात के कुछ इलाकों, दमन और दीव, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कई क्षेत्रों में बारिश का सिलसिला शुरू हो गया है। इसके अतिरिक्त उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, लद्दाख, जम्मू-कश्मीर और हरियाणा-पंजाब के कुछ हिस्सों में भी मानसून ने दस्तक दी है। IMD के अनुसार, 1 जुलाई को मॉनसून की उत्तरी सीमा पोरबंदर, वल्लभ विद्यानगर, शाजापुर, नौगांव, मिर्जापुर, आजमगढ़, अयोध्या, बदायूं, मेरठ, करनाल और गुरदासपुर से होकर गुजर रही है।
पिछले वर्षों में दिल्ली में मानसून का आगमन
यदि हम पिछले वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें, तो इस बार दिल्ली में मानसून काफी देरी से पहुंच रहा है। 2020 में यह 25 जून को दिल्ली पहुंचा था, और एक दिन बाद 26 जून को पूरे देश में फैल गया। 2021 में मानसून 13 जुलाई को दिल्ली पहुंचा और उसी दिन पूरे भारत में फैल गया। 2022 में यह 30 जून को दिल्ली में आया और 2 जुलाई तक पूरे देश में सक्रिय हो गया। 2023 में यह 25 जून को दिल्ली पहुंचा, जबकि पूरे देश में 2 जुलाई तक फैल गया। वहीं, 2024 में मानसून 28 जून को दिल्ली पहुंचा और 2 जुलाई तक पूरे भारत में फैल चुका था। पिछले साल दक्षिण-पश्चिम मानसून 29 जून को दिल्ली पहुंचा था।
दिल्ली के लिए येलो अलर्ट और मौजूदा मौसम
मौसम विभाग ने बुधवार रात के लिए दिल्ली में बादल छाए रहने और मध्यम बारिश की संभावना जताई है, जिसके मद्देनजर येलो अलर्ट भी जारी किया गया है। गुरुवार को भी ऐसा ही मौसम रहने की उम्मीद है। दिल्ली का अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है। बुधवार को सुबह 8:30 बजे से शाम 5:30 बजे के बीच दिल्ली के पांच मुख्य मौसम केंद्रों पर कोई मापने योग्य बारिश दर्ज नहीं हुई, हालांकि सुबह 8:30 बजे तक सफदरजंग, पालम और आयानगर में मामूली बूंदाबांदी हुई। रिज क्षेत्र में 0.2 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि लोधी रोड पर बारिश नहीं हुई।
तापमान में गिरावट और उमस में वृद्धि
बारिश न होने के बावजूद दिल्ली के सभी प्रमुख केंद्रों पर अधिकतम तापमान सामान्य से कम रहा। यह 33.2 से 34.8 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा। सफदरजंग में अधिकतम तापमान 34.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 2.6 डिग्री कम है। पालम में यह 33.6 डिग्री (सामान्य से 4.2 डिग्री कम) और लोधी रोड पर 33.7 डिग्री सेल्सियस (सामान्य से 3.3 डिग्री कम) रहा। न्यूनतम तापमान में भी मामूली बदलाव देखा गया, जिसमें सफदरजंग में यह 28.6 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 0.7 डिग्री अधिक है। रिज में सबसे कम न्यूनतम तापमान 24.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मानसून के आगमन से पहले हवा में नमी का स्तर बढ़ गया है।
मॉनसून में देरी का कारण और आगे का मौसम
स्काईमेट वेदर के उपाध्यक्ष महेश पालावत ने बताया कि इस बार मॉनसून में देरी का मुख्य कारण बंगाल की खाड़ी से आने वाली नम पूर्वी हवाएं हैं, जो अभी तक दिल्ली तक नहीं पहुंची हैं। वर्तमान में पंजाब से लेकर बंगाल की उत्तरी खाड़ी तक फैली ट्रफ रेखा (कम दबाव का क्षेत्र) मॉनसून की रफ्तार को प्रभावित कर रही है। उन्होंने कहा कि बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र बना हुआ है, जिसके प्रभाव से एक कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है। इससे बिहार से लेकर उत्तरी पंजाब तक के मैदानी इलाकों में भारी बारिश होने की संभावना है।
आगामी दिनों में बारिश की संभावना और मॉनसून का आगमन
पालावत ने कहा कि 2 या 3 जुलाई तक पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और उत्तरी राजस्थान में बारिश की गतिविधियां तेज हो जाएंगी। दिल्ली और आसपास के इलाकों में मॉनसून 3 या 4 जुलाई के आसपास पहुंच सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि पूर्वी हवाओं का दिल्ली तक पहुंचना अभी बाकी है, जो मॉनसून की रफ्तार को तेज करने में मदद करेंगी। जब ये हवाएं सेट हो जाएंगी, तो पूरे क्षेत्र में भारी बारिश की संभावना है।










