भोजपुर में पुलिस एनकाउंटर की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का खुलासा
भोजपुर जिले में हाल ही में हुए पुलिस एनकाउंटर के बाद सामने आई पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने सभी को चौंका दिया है। इस रिपोर्ट में पुष्टि हुई है कि मृतक भरत तिवारी के शरीर पर कुल पांच गोलियों के निशान पाए गए हैं। आश्चर्यजनक बात यह है कि ये गोलियां शरीर के निचले हिस्से यानी जांघों और पैरों को निशाना बनाकर चलाई गई थीं। फॉरेंसिक विशेषज्ञों और डॉक्टरों की टीम ने इस रिपोर्ट में बताया है कि एनकाउंटर के दौरान भरत तिवारी के शरीर में पांच गोलियां लगी थीं।
गोलियों के स्थान और पुलिस की भूमिका पर सवाल
मेडिकल जांच में गोलियों के लगने के स्थान का विश्लेषण किया गया, जिसमें पहली गोली बाईं जांघ के ऊपरी हिस्से में लगी। दूसरी गोली बाईं जांघ के अंदरूनी हिस्से में धंसी। तीसरी गोली दाईं जांघ के अंदरूनी हिस्से में लगी। चौथी गोली दाईं जांघ के अंदरूनी भाग को चीरते हुए लगी, और पांचवीं गोली बाईं टांग के पिछले हिस्से में लगी। कानून विशेषज्ञों का मानना है कि केवल पैरों और जांघों में गोलियों का लगना इस बात की ओर संकेत करता है कि या तो पुलिस का मकसद केवल तिवारी को पकड़ना था या फिर जवाबी कार्रवाई का तरीका कुछ और था। अब न्यायिक टीम इस मेडिकल रिपोर्ट का मिलान पुलिस के दावों से कर रही है।
न्यायिक जांच और परिवार का आरोप-प्रत्यारोप
इस पूरे मामले की न्यायिक जांच कर रहे रिटायर्ड जस्टिस विनोद कुमार सिन्हा ने बीते गुरुवार को भरत तिवारी के पैतृक गांव बिलौटी का दौरा किया। उनके साथ जिले के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक भी मौजूद थे। जांच दल ने मृतक के परिवार के सदस्यों से मुलाकात की और घटना की पूरी क्रोनोलॉजी को समझने के लिए उनके बयान दर्ज किए।
शाहपुर पुलिस का दावा है कि 17 जून को जब पुलिस टीम भरत तिवारी को गिरफ्तार करने पहुंची, तो उसने आत्मरक्षा में फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस का कहना है कि उन्होंने जवाबी फायरिंग की, जिसमें तिवारी घायल हो गया और अस्पताल में उसकी मौत हो गई।
वहीं, तिवारी के परिवार ने पुलिस पर फर्जी एनकाउंटर का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि तिवारी ने पहले ही सरेंडर कर दिया था और हथियार जमीन पर फेंक दिए थे। परिवार का दावा है कि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में साफ दिख रहा है कि जब पुलिस ने गोली चलाई, तब तिवारी पूरी तरह निहत्था था।
भरत तिवारी के भाई ने कहा, “रिटायर्ड जस्टिस सिन्हा हमारे घर आए और बिना किसी दबाव के हमारा पक्ष सुना। हमें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। हम चाहते हैं कि जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।”
अब इस न्यायिक जांच और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के प्रकाश में भोजपुर पुलिस बैकफुट पर है। सभी की नजरें जस्टिस सिन्हा की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो इस मामले का सही निष्कर्ष बताएगी।











