मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का आदेश: विवादित इमामबाड़े का उपयोग
मध्य प्रदेश के धार जिले में हाई कोर्ट ने गुरुवार को प्रशासन को निर्देशित किया कि वे विवादित सरकारी इमामबाड़े की चाबियां मुस्लिम समुदाय के एक याचिकाकर्ता को 24 घंटे के भीतर सौंप दें, ताकि वह पांच दिनों तक इसका उपयोग कर सके। यह आदेश मुहर्रम के दौरान ताजिया बनाने के लिए दायर याचिकाओं के संदर्भ में आया है।
इंदौर बेंच ने याचिकाकर्ताओं और उनके समुदाय को अस्थायी तौर पर इमामबाड़े का उपयोग करने की अनुमति दी है। न्यायालय ने कहा कि यदि उन्हें 1 जुलाई तक के लिए जगह दी जाती है, तो इससे राज्य सरकार को कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा। इस इमामबाड़े का उपयोग मुस्लिम समुदाय के धार्मिक समारोहों और शोक कार्यक्रमों के लिए किया जाता है, विशेषकर मुहर्रम के समय।
अंतरिम राहत और विवादित संपत्ति का मामला
कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान, बेंच ने कहा कि संबंधित अधिकारी को निर्देश दिया जाता है कि वे धार जिले के फोर्ट इलाके में स्थित सरकारी इमामबाड़े की चाबियां एक दिन के अंदर याचिकाकर्ता सिद्दीकी को सौंप दें। साथ ही, याचिकाकर्ता को निर्देशित किया गया है कि ताजिया का कार्यक्रम समाप्त होने के बाद वे 1 जुलाई 2026 को दोपहर 12 बजे तक चाबियां वापस कर दें।
अगस्त 2025 में, प्रशासन ने इस इमामबाड़े को लोक निर्माण विभाग (PWD) को सौंप दिया था, जब सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (SDM) कोर्ट ने इसे PWD की संपत्ति घोषित किया। इस कार्रवाई के खिलाफ ताजिया कमेटी ने अपील की थी, जिसे डिविजनल कमिश्नर ने खारिज कर दिया। याचिकाकर्ताओं में से एक, सिद्दीकी ने हाई कोर्ट में इस निर्णय को चुनौती दी।
मुहर्रम के दौरान ताजिया निर्माण की परंपरा और कोर्ट का निर्णय
याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि धार के सरकारी इमामबाड़े में ताजिया बनाने की परंपरा भारत की आजादी से पहले ही शुरू हो चुकी थी। हाई कोर्ट में बहस के दौरान, राज्य सरकार ने कहा कि मुस्लिम समुदाय को ताजिया बनाने के लिए विकल्प के रूप में छोटा इमामबाड़ा और जमातखाना उपलब्ध कराए गए हैं।
कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करते हुए कहा कि जब तक विवादित संपत्ति पर मामला लंबित है, तब तक अधिकारों का निर्धारण किया जाना जरूरी है। कोर्ट ने यह भी माना कि यदि याचिकाकर्ताओं और उनके समुदाय को पांच दिनों के लिए जगह दी जाती है, तो इससे राज्य को कोई नुकसान नहीं होगा। साथ ही, कोर्ट ने कहा कि जब तक विवादित संपत्ति याचिकाकर्ताओं के कब्जे में है, वे उसमें कोई भी निर्माण या बदलाव नहीं करेंगे और संपत्ति को साफ-सुथरे हालत में प्राधिकरण को सौंप देंगे।
अंत में, कोर्ट ने पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग का आदेश दिया और मामले की अगली सुनवाई के लिए 22 जुलाई की तारीख तय की।










