भोजपुर के भरत तिवारी एनकाउंटर विवाद में तेजी से बदलाव
भोजपुर जिले के प्रसिद्ध भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में घटनाक्रम में लगातार परिवर्तन हो रहा है। शुरुआत में पुलिस अपनी कार्रवाई को सही ठहराती रही, लेकिन अब स्थिति ऐसी बन गई है कि प्रशासन को बार-बार अपनी सफाई देनी पड़ रही है। परिजनों के आरोप, जनता का बढ़ता आक्रोश, सोशल मीडिया पर उठते सवाल और राजनीतिक दबाव के कारण सरकार को कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय लेने पड़े हैं।
प्रशासनिक कदम और राजनीतिक दबाव के बीच स्थिति का विकास
भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर उठे विवाद के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के निर्देश पर जगदीशपुर के एसडीपीओ राजेश वर्मा को उनके पद से हटा दिया गया है। उन्हें तत्कालीन पुलिस मुख्यालय से अटैच कर दिया गया है। उनकी जगह पंकज मिश्रा को नया एसडीपीओ नियुक्त किया गया है। यह कदम ऐसे समय में लिया गया है जब एक दिन पहले ही भरत तिवारी की मां आशा देवी के आवेदन पर पुलिस अधिकारियों और जवानों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया था।
मामले का पूरा घटनाक्रम और न्यायिक कार्रवाई
17 जून को भोजपुर के शाहपुर क्षेत्र में हुई पुलिस मुठभेड़ में भरत भूषण तिवारी की मौत हो गई थी। घटना के बाद से ही परिजन और स्थानीय लोग पुलिस की कहानी पर सवाल उठाने लगे। भरत तिवारी की मां आशा देवी ने आरोप लगाया कि उनके बेटे की मौत मुठभेड़ में नहीं, बल्कि पुलिस ने घेरकर गोली मारी है। सोशल मीडिया पर उनके समर्थन में पोस्ट और वीडियो वायरल होने लगे, जिससे मामला पूरे बिहार में चर्चा का विषय बन गया।
मंगलवार को भरत तिवारी की मां की शिकायत पर पुलिस अधिकारियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया। एफआईआर में जगदीशपुर के तत्कालीन एसडीपीओ राजेश कुमार शर्मा, शाहपुर के थानाध्यक्ष राजेश मालाकार और अन्य पुलिसकर्मियों को नामजद किया गया है। आरोप है कि पुलिस टीम भरत को अपने साथ जवइनियां गांव लेकर गई थी, जहां उसने फेसबुक लाइव के जरिए अपनी बात रखी और आत्मसमर्पण कर दिया। परिवार का दावा है कि आत्मसमर्पण के बाद भी उसे नहीं छोड़ा गया और गोली मार दी गई। इस पूरे प्रकरण में यह चौथी एफआईआर है, जिसमें पहली बार पुलिस अधिकारियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ है।
एफआईआर दर्ज होने के तुरंत बाद ही एसडीपीओ को हटाने का निर्णय लिया गया, जिसे राजनीतिक स्तर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पुलिस की कार्रवाई पूरी तरह सही थी, तो फिर इतनी बड़े स्तर पर बदलाव और जांच की आवश्यकता क्यों पड़ी? सरकार का कहना है कि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए हर कदम उठाया जा रहा है।
भिलौटी गांव में बुधवार को एक महापंचायत का आयोजन किया गया है, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल होने की संभावना है। यह पंचायत कुंडेश्वर महादेव मंदिर के पास आयोजित की जाएगी। गांव के लोग, भरत तिवारी के समर्थक, सामाजिक कार्यकर्ता और कई संगठन इस बैठक में भाग ले सकते हैं। प्रशासन की नजर भी इस महापंचायत पर टिकी हुई है, क्योंकि यह मामला अब भावनात्मक और राजनीतिक रूप से जटिल हो चुका है।
भरत भूषण तिवारी 28 वर्ष के थे और भोजपुर जिले के शाहपुर प्रखंड के बिलौटी गांव में रहते थे। सोशल मीडिया पर उनकी सक्रियता और ग्रामीण समस्याओं को उठाने के कारण वे काफी प्रसिद्ध थे। उनके समर्थक कहते हैं कि वह गरीब और विस्थापित परिवारों की आवाज थे, जो अक्सर प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ बोलते और वीडियो बनाते थे। हालांकि, उनके आलोचक कहते हैं कि उनकी भाषा कभी-कभी आक्रामक हो जाती थी, जिससे वे विवादों में रहते थे।
मामले के बढ़ने के बाद सरकार ने भी प्रतिक्रिया दी है। मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा कि सरकार ने तुरंत न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं, जिसमें पुलिस की भूमिका और भरत तिवारी के पास कथित हथियारों का स्रोत भी जांचा जाएगा। पवन सिंह जैसे भोजपुरी फिल्म जगत के प्रसिद्ध कलाकार और एमएलसी ने भी इस मामले पर अपनी राय दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि भरत तिवारी समाज के जागरूक और संवेदनशील व्यक्ति थे, और यदि वायरल वीडियो सही हैं, तो पूरी निष्पक्षता से जांच होनी चाहिए।









