कूनो नेशनल पार्क से निकली मादा चीता का गांव में प्रवेश
मध्यप्रदेश के श्योपुर जिले के विजयपुर क्षेत्र के दुबेरा गांव में उस समय हड़कंप मच गया जब कूनो (Kuno National Park) से निकलकर एक मादा चीता गांव में घुस गई। यह घटना उस समय हुई जब चीता सरकारी प्राथमिक स्कूल के पास तक पहुंच गई, जिससे ग्रामीणों में भय का माहौल बन गया। ग्रामीणों ने लाठी-डंडों का सहारा लेकर उसे आबादी से दूर भगाने का प्रयास किया। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें ग्रामीणों और चीते की मौजूदगी स्पष्ट देखी जा सकती है। वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर अब सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि घटना के तुरंत बाद भी कोई सक्रिय निगरानी नहीं थी। बाद में, कूनो की ट्रैकिंग टीम मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया।
गांव में चीते की घुसपैठ से फैली दहशत और ग्रामीणों की प्रतिक्रिया
मादा चीता सीसीबी 2 रविवार को कूनो (Kuno) के खुले जंगल से निकलकर दुबेरा गांव में पहुंच गई। शुरुआत में वह खेतों के आसपास घूमती रही, लेकिन बाद में रिहायशी इलाकों में दाखिल हो गई। ग्रामीणों के अनुसार, चीता गांव के अंदर और स्कूल के पास तक आ गया था, जिससे बच्चों और महिलाओं में डर का माहौल बन गया। ग्रामीणों ने शोर मचाकर और लाठी-डंडों का प्रयोग कर उसे गांव से बाहर भगाने का प्रयास किया। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग मौके पर जमा हो गए। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें ग्रामीणों की भीड़ और चीते की मौजूदगी साफ देखी जा सकती है। ग्रामीणों का आरोप है कि जब यह घटना हुई, तब वन विभाग या चीता मित्र दल का कोई सदस्य मौके पर मौजूद नहीं था। यदि समय रहते निगरानी टीम सक्रिय हो जाती तो स्थिति बेहतर तरीके से संभाली जा सकती थी। बाद में, वन विभाग की ट्रैकिंग टीम गांव में पहुंची और स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
वन विभाग की निगरानी और ग्रामीण सुरक्षा के कदम
कूनो नेशनल पार्क के डीएफओ (DFO) आर. थिरुकुराल ने बताया कि खुले जंगल में विचरण कर रहे चीते की लगातार निगरानी की जा रही है। विभाग की टीम चीते के साथ है और ग्रामीणों से अपील की है कि वे चीते के नजदीक न जाएं और किसी भी सूचना के तुरंत विभाग को सूचित करें। फिलहाल, वन विभाग की ट्रैकिंग टीम मादा चीता सीसीबी 2 (CCB2) की निगरानी कर रही है। ग्रामीणों ने गांवों में गश्त बढ़ाने और स्कूलों के आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम करने की मांग की है। अब देखना है कि प्रशासन इन ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाता है। यह घटना यह भी दर्शाती है कि वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीण सुरक्षा का भी ध्यान देना आवश्यक है, ताकि ऐसी घटनाएं भविष्य में न दोहराई जाएं।











