दमोह में फर्जी डॉक्टरों का बड़ा खुलासा
मध्य प्रदेश के दमोह जिले में एक बार फिर फर्जी डॉक्टरों के काले कारनामों का पर्दाफाश हुआ है, जो सुर्खियों में बना हुआ है। पिछले वर्ष जहां कथित फर्जी हार्ट सर्जन एम. जॉन केन का मामला सामने आया था, वहीं अब दमोह में नकली MBBS डिग्री के सहारे सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में नौकरी कर रहे एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। इस मामले में राजधानी भोपाल (Bhopal) तक के लिंक भी सामने आ रहे हैं। पुलिस ने अभी तक पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें तीन कथित डॉक्टर, फर्जी डिग्री बनाने वाले मास्टरमाइंड का नेटवर्क और एक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) का डेटा क्लर्क शामिल है। आरोप है कि यह गिरोह लाखों रुपये लेकर नकली MBBS डिग्रियां बनाता था और सरकारी अस्पतालों में नियुक्तियां कराता था।
गिरोह का पर्दाफाश और गिरफ्तारियां
मामले का खुलासा तब हुआ जब दमोह के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) को शिकायतें मिलीं कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत संचालित संजीवनी क्लीनिकों में कुछ डॉक्टर संदिग्ध दस्तावेजों के आधार पर नौकरी कर रहे हैं। प्रारंभिक जांच में इन शिकायतों की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने कार्रवाई शुरू की। जांच के दौरान सबसे पहले ग्वालियर (Gwalior) निवासी कुमार सचिन यादव और सीहोर (Sehore) निवासी राजपाल गौर को हिरासत में लिया गया। दोनों के दस्तावेजों की जांच में उनकी MBBS डिग्रियां पूरी तरह फर्जी पाई गईं। पूछताछ में दोनों ने स्वीकार किया कि उन्होंने पांच लाख रुपये खर्च कर नकली डिग्रियां बनवाई थीं और इन्हीं के आधार पर सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में नौकरी हासिल की।
संपूर्ण नेटवर्क का खुलासा और मुख्य आरोपी
इन दोनों की निशानदेही पर पुलिस ने जबलपुर (Jabalpur) से अजय मौर्य नामक एक कथित डॉक्टर को गिरफ्तार किया, जिसकी डिग्री भी जांच में फर्जी निकली। तीनों गिरफ्तारियों के बाद पुलिस को पता चला कि यह एक संगठित गिरोह है, जो वर्षों से स्वास्थ्य व्यवस्था में सेंध लगा रहा था। जांच में यह भी सामने आया कि इस पूरे रैकेट का मुख्य सरगना ग्वालियर (Gwalior) निवासी मुकेश चौधरी है, जो फिलहाल फरार है।
भोपाल से जुड़े रहस्यमय तार और जांच का विस्तार
सबसे चौंकाने वाला खुलासा भोपाल (Bhopal) से जुड़ा है। जांच में पता चला कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) भोपाल में तैनात डेटा क्लर्क आदिल सिद्दीकी की भूमिका भी संदिग्ध है। आरोप है कि वह नियुक्ति प्रक्रिया में दस्तावेजों को सिस्टम में आगे बढ़ाने और सत्यापन में मदद करता था। पुलिस ने उसे भी गिरफ्तार कर लिया है। उसके सहयोगी हीरा सिंह भी इस फर्जीवाड़े में शामिल था। दोनों को गिरफ्तार कर दमोह पुलिस अपने साथ ले गई है। इन दोनों से मिलकर एक डिग्री के बदले चार से पांच लाख रुपये वसूलने का खुलासा हुआ है।











