भारत में चीता पुनःप्रवेश का सफल प्रयास
भारत का महत्वाकांक्षी ‘प्रोजेक्ट चीता’ वर्ष 2025 तक नई ऊंचाइयों को छूने में सफल रहा है। मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क (KNP) में इस वर्ष तीन मादा चीता ने कुल 12 शावकों को जन्म दिया है। हालांकि, प्राकृतिक आपदाओं और वन्यजीव संघर्ष के कारण इस साल छह चीता और तीन शावकों की मृत्यु हो गई, फिर भी इन बड़ी बिल्लियों का भारत में बढ़ता कुनबा पर्यावरण विशेषज्ञों के लिए उत्साहवर्धक संकेत है।
चीता संरक्षण और पुनःप्रवेश की दिशा में कदम
लगभग सात दशक पहले भारत में विलुप्त हो चुकी इस तेज़ रफ्तार जमीनी जानवर की प्रजाति को पुनः जीवित करने के लिए सरकार ने कई प्रयास किए हैं। सितंबर 2022 में नामीबिया से आठ चीते लाए गए, और फरवरी 2023 में दक्षिण अफ्रीका से बारह और चीते भारत में श्योपुर जिले के कूनो नेशनल पार्क (KNP) में स्थानांतरित किए गए। इन जानवरों की कुल संख्या में से तीन को मंदसौर जिले के गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में स्थानांतरित किया गया है, जबकि अभी 27 चीते KNP में हैं। अब भारत में इन बड़े शिकारियों का तीसरा घर मध्य प्रदेश के सागर जिले के नौरादेही वन्यजीव अभयारण्य में बनने जा रहा है।
आधुनिक संरक्षण प्रयास और भविष्य की योजनाएं
वर्तमान में भारत में कुल 30 चीते मौजूद हैं, जिनमें से 19 शावक देश में ही जन्मे हैं। महत्वाकांक्षी रीइंट्रोडक्शन प्रोजेक्ट के तहत पिछले तीन वर्षों में 20 चीते आयात किए गए हैं, जिनसे देश की चीता आबादी में दस नए जानवर जुड़ चुके हैं। चीता प्रोजेक्ट फील्ड डायरेक्टर उत्तम शर्मा ने बताया कि केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों से इस परियोजना में सफलता मिल रही है। भारत अब बोत्सवाना से आठ और चीते लाने की तैयारी कर रहा है, जो अफ्रीकी देश से पहले ही पकड़ लिए गए हैं और फरवरी तक KNP में पहुंच सकते हैं।










