मध्य प्रदेश के खरगोन में वायरल गर्ल मोनालिसा का असली उम्र का खुलासा
मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में वायरल हो रही गर्ल मोनालिसा का वास्तविक जन्म प्रमाण पत्र 2009 में महेश्वर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (Community Health Center Maheshwar) के रजिस्टर में दर्ज पाया गया है। इस रिकॉर्ड के अनुसार, उसकी जन्मतिथि 30 दिसंबर 2009 है, जो उसकी नाबालिग होने की पुष्टि करता है।
यह जानकारी तब सामने आई जब जांच के दौरान पता चला कि नगर परिषद महेश्वर द्वारा जारी किया गया उसका जन्म प्रमाण पत्र फर्जी था। इस फर्जी दस्तावेज के आधार पर उसकी शादी कराई गई थी, जो अब विवाद का विषय बन गई है। इस मामले में पुलिस ने पॉस्को एक्ट (POCSO Act) के तहत एफआईआर दर्ज कर ली है, जिससे मामला और भी गंभीर हो गया है।
मामले की जड़ें और राजनीतिक विवाद
मोनालिसा के माता-पिता ने मीडिया के सामने कहा कि उनकी बेटी को झूठे प्रमाण पत्र के आधार पर फंसाया गया है। उनका आरोप है कि उनकी बेटी भोली-भाली और सीधी-सादी है, जिसे गुमराह किया गया। उन्होंने सरकार से अपील की है कि उनकी बेटी को जल्द से जल्द वापस दिलाया जाए।
वहीं, भाजपा के एक विधायक ने इस पूरे मामले को ‘लव जिहाद’ का मामला करार दिया है। उनका कहना है कि जानबूझकर मोनालिसा को फंसाया गया है और झूठे दस्तावेज बनाकर उसकी शादी कराई गई है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि इस मामले की तेजी से जांच कराकर आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
राजनीतिक और प्रशासनिक जांच की दिशा
मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (National Human Rights Commission) और राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (National Scheduled Tribes Commission) ने संज्ञान लेकर जांच के आदेश दिए हैं। इसके अलावा, दिल्ली के मानव अधिकार आयोग ने भी खरगोन के एसपी (SP) को मामले की जांच का निर्देश दिया है।
महेश्वर के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर अतुल गौर ने पुष्टि की है कि मोनालिसा का जन्म प्रमाण पत्र उनके कार्यालय ने ही जारी किया था। उन्होंने बताया कि इस प्रमाण पत्र में उसकी जन्म तिथि 30 दिसंबर 2009 ही दर्ज है। वहीं, महेश्वर नगर परिषद (Municipal Council Maheshwar) के सीएमओ (CMO) प्रियंका पांडे ने भी कहा कि मोनालिसा का जन्म प्रमाण पत्र उनके कार्यालय द्वारा ही जारी किया गया था, जिसे बाद में निरस्त कर दिया गया है।
इस पूरे विवाद में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में सही जांच और पारदर्शिता जरूरी है ताकि किसी भी तरह का गलत फायदा न उठाया जा सके।










