ऑन-डिवाइस AI तकनीक का परिचय और महत्व
आज के स्मार्टफोन में मौजूद ऑन-डिवाइस AI (Artificial Intelligence) तकनीक ऐसी अद्भुत क्षमताएँ प्रदान कर रही है, जो बिना इंटरनेट के भी कार्य कर सकती हैं। जब आप अपने फोन को फ्लाइट मोड में डालते हैं, तब भी यह AI आवाज़ को बोलकर टाइप कर सकता है, चेहरे की पहचान कर सकता है, और लंबा टेक्स्ट भी संक्षेप में बदल सकता है। यह सब कैसे संभव हो पाता है? इसका जवाब है कि यह AI आपके फोन के अंदर ही मौजूद है। इसे ऑन-डिवाइस AI कहा जाता है, यानी ऐसी कृत्रिम बुद्धिमत्ता जो किसी दूरस्थ सर्वर पर निर्भर नहीं रहती, बल्कि सीधे आपके फोन की अपनी चिप पर काम करती है। तकनीकी रूप से कहें तो, यह न्यूरल नेटवर्क को रिमोट सर्वर के बजाय फोन के CPU, GPU या NPU (Neural Processing Unit) पर चलाने का तरीका है।
क्लाउड AI और ऑन-डिवाइस AI में मुख्य फर्क
अक्सर बड़े चैटबॉट जैसे ChatGPT या Gemini क्लाउड पर आधारित होते हैं। इन सेवाओं में आपका सवाल इंटरनेट के विशाल डेटा सेंटर तक पहुंचता है, जहां जवाब तैयार होता है और फिर आपके फोन पर भेजा जाता है। इसे आप ऐसी स्थिति से तुलना कर सकते हैं जिसमें आप रेस्टोरेंट का खाना मंगवाते हैं: रसोई बहुत बड़ी और ताकतवर होती है, पर खाना आने में समय लगता है। वहीं, ऑन-डिवाइस AI अपने घर की रसोई की तरह है, जिसमें सीमित संसाधन होते हैं, लेकिन खाना तुरंत तैयार हो जाता है। इसमें किसी बाहरी सर्वर की जरूरत नहीं पड़ती, और यह बिजली और इंटरनेट दोनों के बिना भी काम कर सकता है। यह तकनीक खासतौर पर उन जगहों पर उपयोगी है जहां इंटरनेट कनेक्शन कमजोर या अस्थिर हो।
बिना इंटरनेट के कैसे चलता है AI मॉडल
AI के दो मुख्य चरण होते हैं: प्रशिक्षण (Training) और अनुमान (Inference)। प्रशिक्षण वह प्रक्रिया है जिसमें मॉडल अरबों शब्द, तस्वीरें और आवाजें पढ़कर सीखता है। यह काम हज़ारों शक्तिशाली डेटा सेंटरों में महीनों चलता है और इसे फोन पर संभव नहीं है। दूसरी ओर, अनुमान वह चरण है जब मॉडल अपने सीखे हुए ज्ञान का उपयोग कर सवाल का जवाब देता है। इस प्रक्रिया में मॉडल की एक बड़ी फाइल होती है, जिसमें अरबों वेट्स (भार) होते हैं। यदि यह फाइल फोन में रखी जाए, तो बिना इंटरनेट के भी जवाब दिए जा सकते हैं। इसी वजह से Gemini Nano जैसे छोटे मॉडल लगभग 1.8 से 3.25 अरब पैरामीटर के होते हैं और इन्हें ऑफलाइन चलाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। ये मॉडल फोन के ऑपरेटिंग सिस्टम के अपडेट के साथ आते हैं, और कभी-कभी इंटरनेट की आवश्यकता पड़ती है, लेकिन रोजमर्रा के उपयोग के लिए यह जरूरी नहीं है।











