दिल्ली हाईकोर्ट में वर्चुअल सुनवाई के दौरान अश्लील वीडियो का प्रसारण
दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय की अदालत में उस समय असहज स्थिति उत्पन्न हो गई जब वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान स्क्रीन पर अचानक एक अश्लील फिल्म चलने लगी। अज्ञात उपयोगकर्ता ने कई बार इस फिल्म को चलाया, जिससे न्यायिक प्रक्रिया बाधित हुई। इसके तुरंत बाद वीडियो कॉन्फ्रेंस सिस्टम को बंद करना पड़ा।
साइबर सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल
यह घटना न्यायिक कार्यवाही के दौरान साइबर सुरक्षा की कमजोरियों को उजागर करती है। हाईकोर्ट के सूत्रों के अनुसार, यह अश्लील वीडियो एक पक्षकार श्रीधर सरनोबत और शितजीत सिंह के खातों से चलाए गए थे। घटना के बाद दिल्ली हाईकोर्ट प्रशासन ने दिल्ली पुलिस की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रेटेजिक ऑपरेशन (IFSO) यूनिट को शिकायत दर्ज कराई है, जो इस मामले की जांच करेगी।
साइबर क्राइम यूनिट की जांच और कानूनी कदम
दिल्ली पुलिस की विशेष साइबर क्राइम यूनिट (CFSO) इस तरह के जटिल ऑनलाइन घोटालों, डिजिटल डेटा रिकवरी और संवेदनशील मामलों की जांच में माहिर है। शुरुआती जांच में पता चला है कि वीडियो किसी शितजीत सिंह के अकाउंट से चलाया गया था, जिन्होंने दावा किया कि उनका अकाउंट अमेरिका से हैक किया गया था। उन्हें यह भी नहीं पता कि यह अश्लील सामग्री सुनवाई के दौरान कैसे चली।
जब पहली बार अश्लील कंटेंट दिखा, तो कोर्ट के स्टाफ ने तुरंत वीडियो बंद कर दिया। लेकिन कुछ देर बाद जब इसे फिर से शुरू किया गया, तो उसी यूजर ने फिर से स्क्रीन शेयर कर सामग्री चलाने का प्रयास किया। स्टाफ ने फिर से वीडियो बंद कर दिया और इसे काफी देर तक नहीं चलने दिया। बाद में जब वीडियो फिर से चालू किया गया, तो तीसरी बार स्क्रीन शेयर कर अश्लील सामग्री दिखाई दी। बैकग्राउंड से एक आवाज आई, ‘यह अमेरिका से किया गया हैक है। कृपया तुरंत बैठक बंद कर दें और इसे फिर से न खोलें।’ इस घटना ने न्यायिक प्रक्रिया की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
चीफ जस्टिस ने इस घटना के बाद कानूनी कार्रवाई का निर्देश देते हुए कहा कि उन्होंने रजिस्ट्रार जनरल को आवश्यक कदम उठाने का आदेश दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अदालत की कार्यवाही की रिकॉर्डिंग प्रतिबंधित है, लेकिन जो लोग इस घटना को रिकॉर्ड या प्रसारित कर रहे हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने बताया कि यह घटना न केवल मुख्य न्यायाधीश की अदालत में बल्कि अन्य अदालतों में भी हुई है, जो संस्थान की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाती है।
उन्होंने कहा कि अदालत को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए और ऑनलाइन प्रसारित सामग्री को हटाने के लिए आईटी अधिनियम की धारा 69ए के तहत कदम उठाए जा सकते हैं। प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि उन्होंने पहले ही रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दे दिए हैं कि इस तरह की घटनाओं से निपटा जाए।











