न्यूजीलैंड के फुटबॉलर सरप्रीत सिंह का इतिहास रचने वाला प्रदर्शन
नई दिल्ली में खबर है कि न्यूजीलैंड के फुटबॉलर सरप्रीत सिंह ने फीफा विश्व कप में एक अनूठा कीर्तिमान स्थापित किया है। वह विश्व कप के शुरुआती एकादश में खेलने वाले पहले भारतीय मूल के फुटबॉलर बन गए हैं। 27 वर्षीय इस खिलाड़ी ने लॉस एंजिलिस (Los Angeles) में हुए ग्रुप G के मुकाबले में ईरान के खिलाफ मैदान में उतरकर यह उपलब्धि हासिल की। यह मैच 2-2 की बराबरी पर समाप्त हुआ। ऑकलैंड (Auckland) में पंजाबी मूल के माता-पिता के घर जन्मे सरप्रीत को न्यूजीलैंड के मुख्य कोच Darren Bazeley ने टीम में शामिल किया था। नंबर-10 जर्सी पहनकर उन्होंने आक्रामक मिडफील्डर की भूमिका निभाई और पूरे 90 मिनट मैदान पर रहे। इस दौरान उन्होंने तीन बार गोल करने का प्रयास भी किया, जो भारतीय मूल के खिलाड़ियों के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
भारतीय मूल के खिलाड़ियों का विश्व कप में महत्वपूर्ण योगदान
यह विश्व कप भारतीय मूल के खिलाड़ियों के लिए गर्व का क्षण है। ऑस्ट्रेलिया (Australia) के भारतीय मूल के खिलाड़ी Nishan Velupillay ने भी तुर्किये (Turkey) के खिलाफ मैच में सब्स्टीट्यूट के रूप में पदार्पण किया। इससे पहले, भारतीय मूल के केवल एक खिलाड़ी, पूर्व फ्रांसीसी (France) मिडफील्डर Vikash Dhorasoo, फीफा विश्व कप में भाग ले चुके हैं। उन्होंने 2006 के विश्व कप में फ्रांस की टीम का प्रतिनिधित्व किया था।
सरप्रीत सिंह का भारतीय कनेक्शन और करियर की प्रमुख उपलब्धियां
सरप्रीत सिंह का भारतीय संबंध भी खास है। उन्होंने 2018 में आयोजित इंटरकॉन्टिनेंटल कप में भाग लिया था। इसके अलावा, 2019 में वह जर्मनी (Germany) के प्रसिद्ध फुटबॉल क्लब Bayern Munich (बायर्न म्यूनिख) के लिए खेलने वाले पहले भारतीय मूल के फुटबॉलर बन गए थे। यह करियर की एक और बड़ी उपलब्धि है, जो भारतीय फुटबॉल के लिए प्रेरणादायक है।











