जम्मू-कश्मीर ने रणजी ट्रॉफी में पहली बार इतिहास रच दिया
भारतीय घरेलू क्रिकेट के इतिहास में शनिवार का दिन एक ऐतिहासिक पल के रूप में दर्ज हो गया है। जम्मू-कश्मीर क्रिकेट टीम ने वह उपलब्धि हासिल की है, जो पिछले 67 वर्षों में कभी नहीं हो सकी थी—उन्होंने रणजी ट्रॉफी का खिताब अपने नाम किया। केएससीए हुबली क्रिकेट ग्राउंड पर खेले गए फाइनल मुकाबले में कर्नाटक के साथ मैच ड्रॉ रहा, लेकिन टीम ने पहली पारी में 291 रनों की बड़ी बढ़त के आधार पर विजेता घोषित कर दिया गया।
41 वर्षीय कप्तान की नेतृत्व में टीम ने रचा इतिहास
इस ऐतिहासिक जीत का सबसे खास पहलू रहा 41 वर्षीय कप्तान पारस डोगरा का नेतृत्व। उनकी कप्तानी में टीम ने जो सफलता हासिल की, वह जम्मू-कश्मीर क्रिकेट के इतिहास में सदैव याद रखी जाएगी। पारस डोगरा का नाम अब उन चुनिंदा क्रिकेटरों में शामिल हो गया है, जिन्होंने अपनी टीम को दशकों पुराने सूखे से बाहर निकाला।
पांच दिनों तक चले फाइनल में जम्मू-कश्मीर का दबदबा
पांच दिनों तक चले इस फाइनल में जम्मू-कश्मीर ने शुरुआत से ही कर्नाटक पर दबाव बनाए रखा। पहली पारी में शुभम पुंढीर के शतक की मदद से टीम ने 584 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया। जवाब में कर्नाटक की पूरी टीम महज 293 रन बनाकर पवेलियन लौट गई। आकिब नबी ने पांच विकेट लेकर कर्नाटक के बल्लेबाजी क्रम को तहस-नहस कर दिया। दूसरी पारी में कामरान इकबाल और साहिल लोत्रा ने नाबाद शतक जड़कर टीम की बढ़त 600 के पार पहुंचा दी, जिससे कर्नाटक की वापसी की उम्मीदें खत्म हो गईं। अंतिम दिन के दूसरे सेशन में जब जम्मू-कश्मीर का स्कोर चार विकेट पर 342 रन था, तब दोनों कप्तानों ने ड्रॉ पर सहमति दी और जम्मू-कश्मीर पहली बार रणजी चैंपियन बन गया।











