नागुला चविथी का महत्व और परंपराएं
नागुला चविथी, जिसे नाग चतुर्थी भी कहा जाता है, दक्षिण भारत में विशेष रूप से आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और तमिलनाडु में मनाया जाने वाला एक प्रमुख हिन्दू त्योहार है। यह पर्व मुख्य रूप से महिलाओं द्वारा अपने बच्चों की लंबी उम्र और परिवार की खुशहाली के लिए मनाया जाता है। इस दिन नाग देवताओं की पूजा कर घर में सुख-समृद्धि और शांति की कामना की जाती है।
तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
यह त्योहार शनिवार, 25 अक्टूबर 2025 को मनाया जाएगा। चतुर्थी तिथि का प्रारंभ 25 अक्टूबर को प्रातः 1:20 बजे से होगा और समाप्ति 26 अक्टूबर को दोपहर 3:45 बजे होगी। पूजा का शुभ समय सुबह 10:59 बजे से दोपहर 1:10 बजे तक माना गया है। पूजा से पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें, पूजा स्थल को साफ-सुथरा बनाएं और रंगोली बनाएं। नाग देवता की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। दूध, फल, फूल, चंदन, सिंदूर और ताम्बूल का नैवेद्य अर्पित करें। महिलाएं इस दिन व्रत रखकर नाग देवता की पूजा करती हैं और मंत्रोच्चारण के माध्यम से परिवार की सुख-शांति की कामना करती हैं।
धार्मिक मान्यताएं और त्योहार का उद्देश्य
यह पर्व नाग देवताओं की पूजा के लिए समर्पित है, जिनका हिन्दू धर्म में विशेष स्थान है। माना जाता है कि नाग देवताओं की पूजा से घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है। यह त्योहार विशेष रूप से महिलाओं द्वारा अपने बच्चों की रक्षा और परिवार की खुशहाली के लिए मनाया जाता है। श्रावण माह की शुक्ल पक्ष चतुर्थी को यह त्योहार मनाया जाता है, और इस दिन गुस्सा, झगड़ा और नकारात्मक कार्यों से दूर रहना चाहिए।











