देव दीपावली का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
देव दीपावली का त्योहार कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर मनाया जाता है, जो भारतीय संस्कृति में अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और माँ गंगा की पूजा का विशेष महत्व है, और मान्यता है कि इस दिन देवता स्वयं पृथ्वी पर उतरते हैं और गंगा में स्नान करते हैं। इस त्योहार का मुख्य उद्देश्य अंधकार को प्रकाश से दूर करना और श्रद्धालुओं के जीवन में सुख-समृद्धि लाना है।
पवित्र नदियों और जलस्थलों पर दीपदान का महत्व
देव दीपावली पर केवल गंगा ही नहीं, बल्कि यमुना, गोदावरी, नर्मदा, सरयू, ताप्ती और कृष्णा जैसी अन्य पवित्र नदियों में भी दीप जलाना अत्यंत शुभ माना जाता है। इन जलाशयों में दीपक जलाने से धार्मिक मान्यताओं के अनुसार घर-परिवार में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। यदि आप इन स्थानों तक नहीं पहुंच सकते, तो अपने घर के तालाब, कुआं या किसी भी जल स्रोत के पास दीपक जलाना भी शुभ फलदायक माना गया है।
घर में दीपक जलाने का धार्मिक महत्व
यदि आसपास कोई नदी या तालाब नहीं है, तो घर के मंदिर में दीपक जलाना भी इस त्योहार का अभिन्न हिस्सा है। घर के मुख्य द्वार, बालकनी या छत पर दीपक जलाकर आप देवताओं का स्वागत कर सकते हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर के उत्तर-पूर्व दिशा में दीपक जलाना शुभ माना जाता है, जिससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इससे घर में सुख-समृद्धि और वांछित खुशहाली आती है।
दीपदान का शुभ समय और विधि
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा की रात दीपदान का सबसे उत्तम समय संध्या के बाद प्रदोष काल माना गया है। इस समय जब गंगा आरती या घर की पूजा समाप्त हो जाती है, तब दीपक जलाना शुभ माना जाता है। परंपरा के अनुसार, 11, 21, 51, 108 या 365 दीयों का दीपक जलाना शुभ माना जाता है। कई श्रद्धालु संकल्प लेकर 1008 या उससे अधिक दीपक भी जलाते हैं।
दीपक जलाने के लिए उपयुक्त सामग्री और मंत्र
दीपक जलाने के लिए शुद्ध घी या तिल का तेल सर्वोत्तम माना जाता है। बाती के रूप में कपास का उपयोग करें और दीपक जलाते समय भगवान विष्णु या शिव का नाम जपें। इससे न केवल धार्मिक अनुष्ठान की पूर्णता होती है, बल्कि घर में सुख-शांति और समृद्धि का वास भी होता है।









