भोपाल में पेड़ काटने का विवादित मामला सामने आया
भोपाल के कलियासोत क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण के नाम पर पेड़ काटने का एक विवादित मामला प्रकाश में आया है। नगर निगम ने एक कंपनी को लगभग दस हजार नए पौधे लगाने का टेंडर दिया था, लेकिन इसके पहले ही सैकड़ों पुराने और हरे-भरे पेड़ काट दिए गए। इस क्षेत्र में कई कांटेदार पेड़ थे, जिन्हें ठेकेदार ने अपने कर्मचारियों से काटवाया। हालांकि, स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इन कांटेदार पेड़ों के पीछे कई सुंदर और स्वस्थ पेड़ भी काट दिए गए।
स्थानीय लोगों का आरोप और जांच का आदेश
जब ‘आजतक’ की टीम मौके पर पहुंची, तो पाया कि इस जगह पर केवल पेड़ों के सूखे ठूंठ ही बचे हैं। कटे हुए पेड़ या तो हटा दिए गए हैं या मैदान के किनारे फेंक दिए गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यहाँ नीम, गूलर और शीशम जैसे पेड़ भी काटे गए हैं। इस मामले में भोपाल नगर निगम के अध्यक्ष ने कहा कि मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं। अभी तक की जांच में ठेकेदार की लापरवाही का पता चला है, जिसके कारण उस पर साढ़े तीन लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। साथ ही यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कहीं निगम के किसी अधिकारी की इसमें मिलीभगत या लापरवाही तो नहीं।
प्रश्न उठता है कि हरियाली क्यों उजाड़ी गई?
यह सवाल उठता है कि यदि पहले से ही इस क्षेत्र में हरियाली मौजूद थी, तो फिर उसे क्यों काटा गया? विडंबना यह है कि जिस अभियान का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण और हरियाली बढ़ाना है, उसी के तहत पहले से खड़ी पेड़ ही नष्ट कर दिए गए। आखिरकार, क्या पर्यावरण संरक्षण का मतलब नए पौधे लगाना है या फिर पुराने पेड़ों को सुरक्षित रखना? एक पेड़ को वृक्ष बनने में दशकों का समय लगता है, जबकि कुछ ही मिनटों में उसे काटा जा सकता है।









