जबलपुर क्रूज हादसे की भयावहता और पीड़ित परिवार
जबलपुर (Jabalpur) में हुए क्रूज दुर्घटना ने न केवल परिवारों को गहरा सदमा पहुंचाया है, बल्कि पूरे क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है। इस हादसे में दस वर्षीय तनिष्क अपने माता-पिता का इंतजार कर रहा है, जबकि उसकी आंखों में उम्मीद की किरणें हैं। परिवार के सदस्य जानते हैं कि अब इस सवाल का कोई जवाब नहीं बचा है कि उनकी मम्मी कब आएंगी। जबलपुर क्रूज दुर्घटना ने इस परिवार से न केवल एक सदस्य को छीन लिया, बल्कि उनके बचपन की मासूमियत, भरोसे और शांति को भी खत्म कर दिया है। इस हादसे में अब तक नौ लोगों की मौत हो चुकी है, और कई लोग गंभीर रूप से घायल हैं।
क्रूज यात्रा का रोमांच और अचानक आई तबाही
42 वर्षीय मनोज श्रीवास अपने परिवार के साथ एक यादगार दिन बिताने निकले थे। उन्होंने पत्नी, छोटे भाई और तीन बच्चों के साथ बरगी डैम (Barghi Dam) में क्रूज राइड का प्लान बनाया था। यह यात्रा बच्चों के लिए एक रोमांचक अनुभव थी, जिसमें वे पानी के बीच, हवा के झोंकों के साथ एक छोटी सी नाव यात्रा का आनंद ले रहे थे। शुरुआत में सब कुछ सामान्य था, बच्चे हंस रहे थे, तस्वीरें ले रहे थे और माता-पिता इस पल का आनंद ले रहे थे। लेकिन जैसे ही मौसम ने करवट ली, हवा तेज होने लगी और आसमान में बादल घिर आए। इसके बावजूद क्रूज अपनी यात्रा जारी रखी। तभी जब स्थिति बिगड़ने लगी, तो लाइफ जैकेट भी तभी दी गई जब हालात बेकाबू हो गए। तेज हवाओं के कारण लहरें ऊंची उठने लगीं और अचानक क्रूज डगमगाने लगा।
अचानक पलटने और बचाव कार्य की जद्दोजहद
यह सब इतनी तेजी से हुआ कि किसी को संभलने का मौका नहीं मिला। क्रूज अचानक पलट गया और पानी अंदर भरने लगा। यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई, हर तरफ चीख-पुकार मची थी। कुछ अपने बच्चों को पकड़ने की कोशिश कर रहे थे, तो कई अपने माता-पिता को ढूंढ रहे थे। पानी में जिंदगी बचाने की जद्दोजहद शुरू हो गई थी। इस हादसे में तनिष्का का कहना है कि वह उस पल को कभी नहीं भूल सकती, जब उसके पिता, चाचा और छोटे भाई एक-दूसरे का हाथ पकड़कर बचने की कोशिश कर रहे थे। वह और उसकी बहन और मां उस समय बिछड़ गए थे। पहले मनोज और तनिष्क को बाहर निकाला गया, फिर उसकी बहन और उसकी बहन को, लेकिन उसकी मां कहीं नहीं मिली। तुरंत ही स्थानीय नाविकों और प्रशासन ने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। आसपास के लोगों ने भी अपनी जान जोखिम में डालकर मदद की। करीब 15 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया, लेकिन कई लोग पानी में फंसे रहे। गोताखोरों और SDRF (State Disaster Response Force) की टीमों ने लगातार सर्च ऑपरेशन चलाया, जिसमें अब तक नौ शव बरामद किए गए हैं और 23 लोग घायल हैं। अभी भी कई लोग लापता हैं। रेस्क्यू टीम की वैन में बैठी एक बच्ची की आंखों में डर साफ देखा जा सकता था, जब उससे पूछा गया कि क्या हुआ, तो उसने बताया कि उसकी मां और भाई नहीं मिल रहे हैं।









