मध्य प्रदेश में मानसून का निर्णायक मोड़ और भारी वर्षा की संभावना
मध्य प्रदेश में मानसून अब एक महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश कर चुका है। बंगाल की खाड़ी से विकसित हुई गहरे अवदाब (Deep Depression) तेजी से पश्चिम की ओर बढ़ते हुए प्रदेश के मध्य छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) तक पहुंच चुका है। अगले 24 घंटों में यह प्रणाली पूर्वी मध्य प्रदेश (Eastern Madhya Pradesh) में प्रवेश करेगी, जिससे प्रदेश में मानसून को नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, इस प्रणाली के सक्रिय होने से 29 जुलाई से 1 अगस्त के बीच व्यापक और कई स्थानों पर अत्यधिक वर्षा होने की संभावना है। अब तक प्रदेश में मानसून सामान्य से कमजोर रहा है, जून से जुलाई के अंत तक कुल 359.3 मिमी वर्षा दर्ज हुई है, जबकि सामान्य वर्षा 428.9 मिमी होनी चाहिए थी। इस तरह प्रदेश अभी भी लगभग 16 प्रतिशत वर्षा की कमी से जूझ रहा है। हालांकि, पिछले सप्ताह हुई अच्छी बारिश ने स्थिति में सुधार के संकेत दिए हैं।
गहरे अवदाब का प्रभाव और मौसम प्रणालियों का संयुक्त प्रभाव
बुधवार दोपहर 11:30 बजे गहरे अवदाब का केंद्र 21.9° उत्तरी अक्षांश और 82.8° पूर्वी देशांतर पर मध्य छत्तीसगढ़ में था। यह प्रणाली लगभग 220 किलोमीटर पूर्व में मलांजखंड (मध्य प्रदेश) से स्थित थी और लगभग 20 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पश्चिम की ओर बढ़ रही थी। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले 24 घंटों में यह छत्तीसगढ़ को पार कर पूर्वी मध्य प्रदेश में प्रवेश करेगा। सामान्यतः ऐसी प्रणालियां अपने दक्षिण और पश्चिमी भागों में अत्यधिक नमी लाती हैं, इसलिए इस बार पश्चिमी और पूर्वी मध्य प्रदेश दोनों क्षेत्रों में भारी से अति भारी वर्षा की संभावना बन गई है।
इसके अलावा, वर्तमान में कई मौसम प्रणालियां एक-दूसरे को मजबूत कर रही हैं। समुद्र तल पर मानसून द्रोणिका श्रीगंगानगर (Sriganganagar), भिवानी (Bhiwani), ग्वालियर (Gwalior), सीधी (Sidhi), गहरे अवदाब के केंद्र और पुरी (Puri) से बंगाल की खाड़ी (Bay of Bengal) तक विस्तृत है। साथ ही, उत्तर पाकिस्तान और जम्मू क्षेत्र पर पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) और पूर्वोत्तर असम (Assam) पर ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय है। इन सभी प्रणालियों के संयुक्त प्रभाव से मध्य भारत में मानसून अत्यंत सक्रिय हो गया है।
प्रदेश में वर्षा का वर्तमान हाल और आगामी दिनों की संभावनाएं
पूर्वी मध्य प्रदेश में अब तक 398.0 मिमी वर्षा हुई है, जो सामान्य से 15 प्रतिशत कम है। वहीं, पश्चिमी मध्य प्रदेश में 329.6 मिमी वर्षा दर्ज की गई है, जो सामान्य से 17 प्रतिशत कम है। हालांकि, कुछ जिलों ने उल्लेखनीय सुधार किया है। देवास (Dewas) में सामान्य से 21 प्रतिशत, बुरहानपुर (Burhanpur) में 16 प्रतिशत, भिंड (Bhind) में 9 प्रतिशत, उमरिया (Umaria) में 8 प्रतिशत, शहडोल (Shahdol) और मऊगंज (Maunganj) में 5 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है। इसके विपरीत, रीवा (Rewa) (-62%), अलीराजपुर (Alirajpur) (-61%), दतिया (Datia) (-47%), मुरैना (Mauganj) (-45%), नर्मदापुरम (Narmadapuram) (-42%), मैहर (Maihar) (-35%), धार (Dhar) (-34%), झाबुआ (Jhabua) (-31%) और शिवपुरी (Shivpuri) (-30%) जैसे जिलों में वर्षा का अभाव गंभीर बना हुआ है।
मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि यदि गहरे अवदाब का वर्तमान अनुमानित मार्ग सही रहा, तो प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में भारी वर्षा हो सकती है। खासतौर पर जबलपुर (Jabalpur), शहडोल (Shahdol), सागर (Sagar), नर्मदापुरम (Narmadapuram), भोपाल (Bhopal), इंदौर (Indore), उज्जैन (Ujjain) और ग्वालियर-चंबल (Gwalior-Chambal) संभागों में वर्षा तीव्रता से बढ़ सकती है। 29 और 30 जुलाई को पूर्वी मध्य प्रदेश में, जबकि 30 और 31 जुलाई को पश्चिमी मध्य प्रदेश में भारी से अति भारी वर्षा की संभावना है। कुछ स्थानों पर 204 मिमी से अधिक अत्यंत भारी वर्षा भी हो सकती है। यदि यह पूर्वानुमान सही साबित होता है, तो प्रदेश का वर्तमान 16 प्रतिशत वर्षा घाटा तेजी से कम होकर सामान्य के करीब पहुंच सकता है, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहां जुलाई के पहले पखवाड़े में वर्षा कम रही थी।
यह वर्षा खरीफ फसलों जैसे धान, सोयाबीन, मक्का, उड़द और तिल के लिए अत्यंत लाभकारी साबित हो सकती है। जिन क्षेत्रों में बुआई के बाद पर्याप्त नमी नहीं मिल पाई थी, वहां फसलों को नई जान मिल सकती है। साथ ही, जलाशयों, बांधों और भूजल स्तर में सुधार की संभावना भी बनी हुई है। हालांकि, अत्यधिक और लगातार वर्षा से निचले इलाकों में जलभराव, नदी-नालों का उफान, शहरी बाढ़, सड़क और रेल यातायात में बाधाएं और कच्चे मकानों व फसलों को नुकसान पहुंचने का खतरा भी बना रहेगा। इसलिए, प्रशासन और आम नागरिक दोनों को सतर्क रहने की आवश्यकता है।









