उज्जैन का तंत्र मंत्र और साधना का ऐतिहासिक महत्व
उज्जैन को सदियों से महाकाल की नगरी के रूप में जाना जाता है, जहां तंत्र और साधना का गहरा संबंध रहा है। यह शहर तांत्रिक क्रियाओं और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए विश्व प्रसिद्ध है। खासतौर पर दीपावली की रात को यहां के श्मशान घाटों पर तांत्रिकों और साधकों का जमावड़ा देखने को मिलता है, जो इस क्षेत्र की परंपराओं का हिस्सा है।
विक्रांत भैरव श्मशान का विशेष महत्व
इस बार उज्जैन का विक्रांत भैरव श्मशान खास चर्चा में है। यहां बिहार चुनाव में जीत सुनिश्चित करने के लिए तांत्रिक क्रियाएं कराई जा रही हैं। तंत्र साधक जयवर्धन भारद्वाज ने बताया कि धनतेरस की रात से ही विशेष अनुष्ठान शुरू हुआ है, जो दीपावली की रात को पूरा होगा। उनका कहना है कि इन अनुष्ठानों का मुख्य उद्देश्य चुनाव में विजय प्राप्ति है, और कई प्रत्याशी अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए इन तांत्रिक क्रियाओं में लगे हैं।
शामिल तांत्रिक अनुष्ठान और उनका प्रभाव
यह स्थान स्वयं भैरव जी की साधना स्थली माना जाता है, जिसे भैरवगढ़ भी कहा जाता है। यहां किए गए तप और अनुष्ठान सफलता, सिद्धि और विजय की दिशा में प्रभावी माने जाते हैं। तांत्रिक मानते हैं कि इन क्रियाओं से न केवल चुनावी सफलता मिलती है, बल्कि शारीरिक और मानसिक शक्ति भी बढ़ती है। दीपावली की रात को जब पूरा शहर रोशनी से जगमगाता है, तब कुछ साधक अंधकार में रहकर शक्ति और लक्ष्मी की प्राप्ति के लिए तंत्र साधना करते हैं।











