उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच मस्जिद विवाद बढ़ा
उज्जैन में सिंहस्थ 2028 के आयोजन की तैयारियों के दौरान सोमवार सुबह शाही मस्जिद के प्रभावित हिस्से को हटाने को लेकर तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई। कंठाल चौराहे से गोपाल मंदिर तक सड़क का चौड़ाई बढ़ाने का कार्य चल रहा है, जिसमें मस्जिद का एक हिस्सा भी आ रहा है। प्रशासन की ओर से इसे हटाने की योजना बनाते ही भारी संख्या में लोग मस्जिद के आसपास जमा हो गए। पुलिस और सुरक्षा बल पहले से तैनात थे, लेकिन विरोध के बढ़ने के साथ ही पथराव और आंसू गैस के प्रयोग की नौबत आ गई।
सहमति के बावजूद विरोध क्यों बढ़ा, जानिए पूरी कहानी
यह सवाल उठता है कि जब प्रशासन और शहर काजी के बीच सड़क चौड़ीकरण को लेकर सहमति बन चुकी थी, तो फिर सोमवार सुबह अचानक इतना बड़ा विरोध क्यों शुरू हो गया। दरअसल, रविवार रात प्रशासन और शहर काजी खलिकुर्ररेहमान के बीच बातचीत हुई थी, जिसमें तय हुआ कि प्रभावित हिस्से को खुद मस्जिद के लोग ही हटाएंगे। इस प्रक्रिया में सीधे तोड़ने के बजाय, मस्जिद से जुड़े लोग ही अपने हिस्से को सड़क चौड़ीकरण के तहत हटाएंगे। यह जानकारी खुद उज्जैन के कलेक्टर रौशन कुमार ने दी है। साथ ही, कलेक्टर के आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर शहर काजी का वीडियो भी साझा किया गया है, जिसमें उन्होंने कहा है कि मस्जिद कमेटी अपने हाथों से ही मस्जिद को तोड़ रही है और सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे फर्जी माहौल से सावधान रहने की अपील की है।
विरोध क्यों हो रहा है और क्या है मस्जिद का असली मुद्दा
विरोध का मुख्य कारण यह है कि सड़क चौड़ीकरण के लिए पूरी शाही मस्जिद को गिराने की योजना नहीं है। प्रस्तावित कार्रवाई में केवल वही हिस्सा हटाया जाएगा जो 15 मीटर की सड़क के निर्धारित मार्ग में आ रहा है। इसमें एक नमाज पढ़ने वाली जगह का एक हिस्सा, लगभग 120 फीट ऊंची मीनार और मजहर चौक शाही का एक हिस्सा शामिल है। उच्च न्यायालय ने 9 सितंबर को इस कार्रवाई के खिलाफ दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया था, जिसमें कहा गया था कि पहले ही कई धार्मिक ढांचों को हटा दिया गया है और यह सड़क सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के लिए आवश्यक है। पुलिस का कहना है कि समाज के सभी वर्ग और समुदाय अपने-अपने क्षेत्रों में सहयोग कर रहे हैं, और मस्जिद समिति भी इस कार्य में लगी हुई है।










