बिहार के कटिहार जिले में नदी पार करने की समस्या गंभीर बनी हुई
बिहार के कटिहार जिले के मोरसंडा गांव से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जो ग्रामीण जीवन की कठिनाइयों को उजागर करती है। आजादी के कई दशक बीत जाने के बाद भी यहां के ग्रामीणों को अपने प्रियजनों के अंतिम संस्कार के लिए जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ती है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में यह दृश्य स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है, जो बिहार की विकास की हकीकत को बयां कर रहा है।
बरंडी नदी का ज्वलंत मुद्दा और ग्रामीणों की जद्दोजहद
बरंडी नदी, जो मोरसंडा पंचायत से गुजरती है, केवल एक जलधारा नहीं है बल्कि तीन पंचायतों के कई गांवों को जोड़ने वाली मुख्य जीवनरेखा है। यह नदी प्रखंड मुख्यालय फलका के लिए मात्र चार किलोमीटर का रास्ता प्रदान करती है, लेकिन बिना पुल के यदि कोई ग्रामीण नदी को पार किए बिना जिला मुख्यालय जाना चाहता है, तो उसे 12 किलोमीटर का लंबा चक्कर लगाना पड़ता है। हर साल बाढ़ के दौरान ग्रामीण अपने निजी संसाधनों से अस्थाई बांस का पुल बनाते हैं, लेकिन तेज बहाव में वह भी टिक नहीं पाता।
ग्रामीणों की पीड़ा और सरकार की अनदेखी
जब सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो की गहन जांच की गई, तो यह स्पष्ट हुआ कि बीते दिनों मोरसंडा के 50 वर्षीय अरविंद महलदार का निधन हो गया था। उनके शव को अंतिम संस्कार के लिए नदी के पार ले जाना पड़ा, क्योंकि नदी पर कोई पुल नहीं था। ग्रामीणों को शव की अर्थी को अपने कंधों पर उठाकर गहरे पानी से गुजरना पड़ा, जिसमें पानी का बहाव बहुत तेज था। इस क्षेत्र की भौगोलिक और राजनीतिक जटिलताएं भी इस समस्या को बढ़ा रही हैं। लोकसभा क्षेत्र पूर्णिया से संबंधित होने के बावजूद, यहां के सांसद और विधायक इस समस्या का समाधान नहीं कर सके हैं। स्थानीय निवासी सुमन का कहना है कि पिछले 20 वर्षों से नदी में पैदल ही पार हो रहे हैं, जबकि सरकार ने कई बार पुल बनाने का वादा किया है, लेकिन अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है।









