भोपाल में ट्विशा शर्मा मौत का मामला जटिल मोड़ ले रहा है
भोपाल के कटारा हिल्स में नोएडा (Noida) निवासी ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है। पुलिस इस घटना को आत्महत्या के रूप में जांच रही है, जबकि दोनों पक्ष एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं। इस बीच, मामला कानूनी प्रक्रिया में आगे बढ़ रहा है। ट्विशा की सास और रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह ने एक इंटरव्यू में कई महत्वपूर्ण दावे किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्विशा के माता-पिता उनके बेटे समर्थ सिंह को जेल भेजने और उसकी जमानत रद्द कराने के लिए दबाव बना रहे हैं। उनका कहना है कि यह पूरा मामला बदले की भावना और सुनियोजित रणनीति का हिस्सा है।
सास का आरोप और अंतिम संस्कार को लेकर विवाद
गिरिबाला सिंह ने यह भी कहा कि अंतिम संस्कार को रोकना गलत है और इससे मृत आत्मा को शांति नहीं मिल पा रही है। उनका दावा है कि जांच पूरी होने से पहले ही सामाजिक और कानूनी दबाव बनाया जा रहा है, जो न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है। वहीं, ट्विशा के परिवार ने ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि यह मामला दहेज उत्पीड़न, मानसिक प्रताड़ना, शारीरिक हिंसा और हत्या से जुड़ा हो सकता है। परिवार ने दूसरे पोस्टमार्टम और न्यायिक निगरानी में जांच की मांग की है। उन्होंने अंतिम संस्कार करने से भी इनकार कर दिया है।
मानसिक स्वास्थ्य और सिज़ोफ्रेनिया का संदर्भ
इस पूरे मामले में अब मानसिक स्वास्थ्य का भी पहलू सामने आया है। गिरिबाला सिंह का दावा है कि ट्विशा शर्मा मानसिक तनाव, चिंता और कथित सिज़ोफ्रेनिया (Schizophrenia) जैसी मानसिक बीमारियों का इलाज करवा रही थीं। उनके अनुसार, उन्हें काउंसलिंग और मेडिकल ट्रीटमेंट मिल रहा था। उन्होंने यह भी कहा कि डॉक्टरों द्वारा दी गई दवाइयां सामान्यतः ऐसे मानसिक स्वास्थ्य मामलों में दी जाती हैं, लेकिन अंतिम मेडिकल रिपोर्ट विशेषज्ञ ही दे सकते हैं।
यह घटना 12 मई की रात की बताई जा रही है, जब ट्विशा अपने ससुराल में मृत पाई गई थीं। पुलिस इसे संदिग्ध आत्महत्या मानकर जांच कर रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है और समर्थ सिंह व गिरिबाला सिंह के खिलाफ दहेज हत्या और उत्पीड़न के आरोप दर्ज किए गए हैं।
सास गिरिबाला सिंह ने यह भी कहा कि उन पर प्रभावशाली होने या जांच को प्रभावित करने के आरोप गलत हैं। उनका तर्क है कि यदि उनका इतना प्रभाव होता तो एफआईआर दर्ज ही नहीं होती। दूसरी ओर, ट्विशा के परिवार का कहना है कि उन्हें कई संदेश मिले हैं, जिनमें उसने मानसिक तनाव और ससुराल में प्रताड़ना का जिक्र किया था। परिवार ने निष्पक्ष जांच, सबूतों की सुरक्षा और न्यायिक निगरानी की मांग की है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच विभिन्न कोणों से की जा रही है और सभी आरोपों की गहराई से पड़ताल की जा रही है। वर्तमान में यह मामला न्यायिक प्रक्रिया और जांच के अधीन है।
मनोचिकित्सक डॉक्टर अवनी गुप्ता का कहना है कि सिज़ोफ्रेनिया एक गंभीर मानसिक बीमारी है, जिसका समय पर इलाज जरूरी है। यदि इसका उपचार नहीं किया गया, तो यह व्यक्ति के दैनिक जीवन, कार्यकुशलता और सामाजिक रिश्तों को प्रभावित कर सकता है। लक्षण दिखने पर मरीज का व्यवहार बदलने लगता है और उसे अपने ही करीबी लोगों पर शक होने लगता है, जिससे पारिवारिक और सामाजिक संबंध कमजोर हो सकते हैं। इसलिए, समय रहते इलाज कराना अत्यंत आवश्यक है। मरीज को डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए, नियमित दवाइयां लेनी चाहिए और उपचार में लापरवाही नहीं करनी चाहिए।











