मध्य प्रदेश में कोल्ड्रिफ कफ सिरप से बच्चों की मौत का मामला
मध्य प्रदेश में कोल्ड्रिफ कफ सिरप के सेवन से 26 बच्चों की दुखद मौत के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इस घटना ने स्वास्थ्य और सुरक्षा के मुद्दों को फिर से उजागर कर दिया है। इस मामले में जांच के दौरान पता चला है कि सिरप में डायएथलीन ग्लाइकॉल (DEG) की मात्रा 48.6 प्रतिशत पाई गई, जबकि इसकी सुरक्षित सीमा केवल 0.01 प्रतिशत होनी चाहिए।
पूर्व मुख्यमंत्री का आरोप और सरकार की भूमिका
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने इस घटना के पीछे सरकार की मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा कि दवा कंपनियों पर कार्रवाई न करना सरकार का स्वार्थ है। उनका दावा है कि ये कंपनियां चुनावी चंदा देकर बीजेपी को समर्थन देती हैं, जिससे उनकी जिम्मेदारी से बचा जा रहा है। सिंह ने सवाल किया कि यदि जांच में साबित हो गया कि सिरप में जहरीला रसायन मिला है, तो स्वास्थ्य मंत्री को अपने पद पर बने रहना चाहिए या नहीं।
चंदा और दवाओं की गुणवत्ता पर गंभीर आरोप
दिग्विजय सिंह ने खुलासा किया कि इन कंपनियों ने चुनावी फंड के रूप में कुल 945 करोड़ रुपये बीजेपी को दिए हैं। साथ ही, उन्होंने बताया कि इनमें से 35 कंपनियों की दवाओं की गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरी है। यह स्थिति दर्शाती है कि जनता की सुरक्षा से खिलवाड़ किया जा रहा है और सत्ता संरक्षण के कारण जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।
आगे की कार्रवाई और जनता की सुरक्षा की मांग
पूर्व मुख्यमंत्री ने केंद्र और राज्य सरकार से त्वरित और कठोर कदम उठाने की अपील की है। उनका कहना है कि बच्चों की मौत के जिम्मेदार कंपनियों और अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही, उन्होंने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए कहा कि सरकार को इस मामले में तुरंत जवाबदेही तय करनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न दोहराई जाएं।









