दिल्ली में संगठित अपराध का बड़ा खुलासा
दिल्ली पुलिस ने एक संगठित गिरोह के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए उस पर शिकंजा कसा है, जो सरकारी अधिकारियों और ट्रैफिक पुलिसकर्मियों को धमकी देकर ब्लैकमेल करता था। क्राइम ब्रांच ने इस मामले में 3000 से अधिक पन्नों की विस्तृत चार्जशीट अदालत में प्रस्तुत की है। यह मामला महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गेनाइज्ड क्राइम एक्ट (MCOCA) के तहत दर्ज किया गया है, जो संगठित अपराधों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का संकेत है।
गिरोह का सरगना और उसकी गतिविधियों का खुलासा
पुलिस के अनुसार, इस गिरोह का मुख्य सरगना राजकुमार उर्फ राजू मीणा था, जो अपने साथियों के साथ मिलकर सरकारी अधिकारियों, ट्रैफिक पुलिसकर्मियों और अन्य व्यक्तियों को निशाना बनाता था। जांच में पता चला है कि आरोपी बेहद योजनाबद्ध तरीके से अपने अपराध को अंजाम देते थे। गिरोह के सदस्य छुपे हुए कैमरों का इस्तेमाल कर वीडियो रिकॉर्डिंग करते थे, फिर इन वीडियो को संपादित कर संबंधित व्यक्तियों को विभागीय कार्रवाई, विजिलेंस जांच और सोशल मीडिया पर बदनाम करने की धमकी देकर मोटी रकम वसूलते थे।
आर्थिक लेनदेन और संपत्तियों का बड़ा खुलासा
जांच में यह भी सामने आया है कि यह ब्लैकमेलिंग और उगाही का नेटवर्क काफी लंबे समय से सक्रिय था। आरोपियों ने डर और बदनामी का हथियार बनाकर कई लोगों से करोड़ों रुपये की वसूली की। पुलिस ने इस मामले में राजकुमार उर्फ राजू मीणा, मुकेश उर्फ पकौड़ी, संजय गुप्ता, जीशान अली और सुरेखा रानी को गिरफ्तार किया है। खास बात यह है कि सुरेखा रानी खुद एक अधिवक्ता हैं और गिरोह के सरगना की पत्नी हैं।
पुलिस ने इस मामले में 10 करोड़ रुपये से अधिक की चल और अचल संपत्तियों का भी पता लगाया है, जो अपराध से अर्जित धन से संबंधित हैं। जांच के दौरान एक अवैध ‘स्टिकर-मार्का’ नेटवर्क का भी पर्दाफाश हुआ है, जो व्यावसायिक वाहनों से अवैध वसूली करता था। इस नेटवर्क का गिरोह की आय का महत्वपूर्ण स्रोत माना जा रहा है। पुलिस का मानना है कि इस मामले की जांच अभी जारी है और जल्द ही नए आरोपियों और नेटवर्क से जुड़े खुलासे भी हो सकते हैं।











