मध्यप्रदेश में छात्रा आकांक्षा चतुर्वेदी की दुखद आत्महत्या
मऊगंज जिले के मगनिया गांव की युवा छात्रा आकांक्षा चतुर्वेदी की मौत ने पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ा दी है। आकांक्षा NEET परीक्षा की तैयारी कर रही थी और हाल ही में आयोजित परीक्षा में उसे लगभग 650 अंक मिलने की उम्मीद थी। परंतु, परीक्षा लीक और रद्द होने की खबरों ने उसकी मानसिक स्थिति को बहुत प्रभावित किया, जिसके कारण उसने यह खतरनाक कदम उठाया।
परीक्षा विवाद और छात्रा का जीवन संकट
आकांक्षा का परिवार कहता है कि NEET परीक्षा के पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने की घटनाओं ने उसकी मानसिक स्थिरता को बिगाड़ दिया। वह लगातार तनाव में रहने लगी थी और तीन दिन पहले उसने खाना-पीना भी छोड़ दिया था। परिवार का आरोप है कि इन घटनाओं ने उसकी आत्मा को तोड़ दिया, और अंततः उसने आत्मघाती कदम उठाया। आकांक्षा नागपुर में रहकर मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रही थी, और परीक्षा के बाद वह बहुत खुश थी, उसे अच्छे अंक आने की उम्मीद थी।
परिवार की आर्थिक और भावनात्मक पीड़ा
आकांक्षा के पिता कृष्ण कुमार चतुर्वेदी किसान हैं, जिन्होंने बेटी को डॉक्टर बनाने के लिए लाखों रुपये का कर्ज लिया था। परिवार का दावा है कि पढ़ाई और कोचिंग के लिए करीब 15 से 20 लाख रुपये का कर्ज हो चुका है। बेटी की मौत की खबर सुनते ही पिता की तबीयत बिगड़ गई और वह अस्पताल में भर्ती हैं। मां नीलम चतुर्वेदी का कहना है कि वह कहती हैं कि पेपर फिर से कराए जा सकते हैं, लेकिन क्या वह अपनी बेटी को वापस ला सकते हैं? आकांक्षा की मौत ने पूरे परिवार को तोड़ कर रख दिया है, और वे इस घटना को लेकर गहरे सदमे में हैं।











