78 वर्षीय महिला ने मराठी में MA में टॉप कर दिखाया अद्भुत साहस
देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में 78 वर्षीय सुषमा मोघे की उपलब्धि ने सभी को प्रेरित किया है। उन्हें राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने मराठी साहित्य (MA) में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर स्वर्ण पदक से सम्मानित किया। इस उम्र में भी पढ़ाई के प्रति उनका जुनून और लगन हर किसी के लिए मिसाल बन गई है।
उम्र के बंधनों को तोड़कर हासिल की सफलता
सुषमा मोघे ने एक न्यूज एजेंसी को बताया कि उन्हें नहीं पता था कि इस उम्र में मराठी में MA कर सकती हैं। जब उन्हें यह जानकारी मिली, तो उन्होंने इस अवसर का पूरा लाभ उठाया। उनके लिए यह सिर्फ एक डिग्री प्राप्त करने का अवसर नहीं था, बल्कि रिटायरमेंट के बाद जीवन में नई ऊर्जा और उद्देश्य पाने का जरिया भी था।
शिक्षा के प्रति उनका समर्पण और प्रेरणादायक संदेश
गोल्ड मेडल विजेता सुषमा ने अपने शिक्षकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा, “उन्होंने मेरा पूरा समर्थन किया और मुझे ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यम से पढ़ाया।” उनकी मातृभाषा मराठी सदैव उनके दिल के करीब रही है। अब वे हिंदी साहित्यकारों की रचनाओं का मराठी में अनुवाद कर रही हैं और साहित्य से अपने जुड़ाव को जारी रखे हुए हैं।
यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर डॉ. राकेश सिंघई ने इस सफलता को गर्व का विषय बताया। उन्होंने कहा कि MA में टॉप पोजीशन हासिल करना और गोल्ड मेडल प्राप्त करना हमारे संस्थान के लिए सम्मान की बात है। दीक्षांत समारोह में अन्य मेधावी छात्र-छात्राओं को भी डिग्री और मेडल से सम्मानित किया गया।
सुषमा मोघे का मानना है कि “अपने खाली समय का सदुपयोग करें और निरंतर पढ़ाई करते रहें। सीखने की कोई सीमा नहीं है, बस उसे पहचानने की जरूरत है।” उनकी कहानी युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है, जो उम्र के बंधनों को तोड़कर अपने सपनों को साकार कर सकते हैं।











