श्योपुर के गांवों में चीता का अनोखा आगमन
श्योपुर जिले के सोईकलां क्षेत्र में इन दिनों सबसे अधिक चर्चा का विषय कोई व्यक्ति या फिल्म स्टार नहीं, बल्कि एक चीता है। यह वही चीता है जिसे कुछ साल पहले कूनो (Kuno) नेशनल पार्क में बड़े उत्साह और उम्मीदों के साथ स्थानांतरित किया गया था। अब यह जंगल की सीमा पार कर गांव के खेतों तक पहुंच गया है, और पिछले तीन दिनों से ग्रामीण उसकी गतिविधियों पर नजरें गड़ाए हुए हैं।
गांव में चीता देखे जाने की खबर से मची हलचल
गुरुनावदा (Gurunavda) गांव में पिछले कुछ दिनों से लोगों को खेतों में एक चीता दिखाई दे रहा है। कभी वह मेड़ों के बीच दौड़ता नजर आता है, तो कभी फसलों के किनारे टहलता है। कई बार वह दूर झाड़ियों में गायब हो जाता है। जिसने भी उसे देखा, पहले तो विश्वास ही नहीं हुआ, फिर मोबाइल से वीडियो बनाना शुरू कर दिया। देखते ही देखते पूरा गांव उस वीडियो को साझा करने लगा।
कुछ लोग इस घटना को उत्साहजनक मान रहे हैं कि उन्होंने पहली बार खुले में चीता देखा है, तो वहीं कई ग्रामीण डर के मारे चिंतित हैं कि अब खेतों में अकेले कैसे जाएं। खेती और मवेशियों की देखभाल करनी है, लेकिन अचानक सामने चीता आ जाए तो? इस आशंका ने गांव में बेचैनी बढ़ा दी है। वन विभाग की टीम तुरंत सक्रिय हो गई है और उसकी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए ट्रैकिंग टीमें तैनात कर दी गई हैं।
वन विभाग की सतर्कता और ग्रामीणों की सावधानी
कूनो नेशनल पार्क के डीएफओ (DFO) आर. थिरुकुराल का कहना है कि जंगल में रहने वाले चीते स्वाभाविक रूप से बड़े क्षेत्र में घूमते हैं। विभाग लगातार उनकी निगरानी कर रहा है और आवश्यकतानुसार अतिरिक्त टीमें भी तैनात की जाएंगी। वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे अकेले खेतों में न जाएं, खासकर सुबह और शाम के समय अधिक सतर्कता बरतें। यदि कहीं चीता दिखाई दे, तो उसके पास जाने या उसे घेरने का प्रयास न करें और तुरंत वन विभाग को सूचित करें।
वर्तमान में कूनो पार्क में 19 चीते खुले जंगल में घूम रहे हैं, जबकि 31 चीते बाड़ों में हैं। इनकी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। कभी-कभी चीते अपने प्राकृतिक व्यवहार के कारण सीमा से बाहर निकलकर आसपास के इलाकों में भी पहुंच जाते हैं। लेकिन ग्रामीणों के लिए यह पहली बार है कि उन्हें खेतों में फसल के साथ-साथ चीते की मौजूदगी का भी ध्यान रखना पड़ रहा है।
गांव के बीच जंगल और खेतों के बीच घूमता यह चीता अब गुरुनावदा और आसपास के इलाकों में लोगों की चिंता का विषय बन गया है। यह सवाल अभी भी अनुत्तरित है कि यह मेहमान आखिर कब वापस जंगल लौटेगा। पिछले तीन दिनों से इन गांवों में सुबह की शुरुआत अब मौसम या खेती की चर्चा से नहीं, बल्कि इस चिंता से हो रही है कि आज चीता कहां दिखा।











