काले झंडे दिखाने के मामले में छात्र की गिरफ्तारी और परीक्षा का प्रभाव
मुख्यमंत्री के काफिले को काले झंडे दिखाने के आरोप में गिरफ्तार छात्र की 12वीं बोर्ड परीक्षा से वंचित होने की खबरों पर कलेक्टर केदार सिंह ने स्पष्टता दी है। उन्होंने बताया कि छात्र की परीक्षा की चिंता को ध्यान में रखते हुए उसे विशेष प्राथमिकता पर रिहा किया गया था। हालांकि, छात्र ने स्वयं परीक्षा में भाग न लेने का निर्णय लिया।
धनपुरी नगरपालिका में उपद्रव और गिरफ्तारी का घटनाक्रम
कलेक्टर ने जानकारी दी कि जिले की धनपुरी नगरपालिका में कुछ असामाजिक तत्वों ने मुख्यमंत्री के काफिले को रोकने और काले झंडे दिखाने का प्रयास किया। उपद्रवियों ने नारेबाजी करते हुए काफिले की गाड़ियों के पीछे दौड़ लगाई। उनके पास झंडे और डंडे थे, जिन्हें देखकर तुरंत ही पुलिस ने कार्रवाई कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया। इस गिरफ्तारी में एक छात्र भी शामिल था।
गिरफ्तार उपद्रवियों का कानूनी प्रक्रिया और छात्र की रिहाई
घटना स्थल से गिरफ्तार किए गए उपद्रवियों के खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज कर उन्हें तहसीलदार के समक्ष पेश किया। जमानत न मिलने पर उन्हें जेल भेज दिया गया। छात्र की गिरफ्तारी के बाद, रात्रि में ही उसे जेल से रिहा कर दिया गया, क्योंकि परीक्षा की चिंता को देखते हुए उसकी रिहाई प्राथमिकता थी। छात्र को सुबह छह बजकर पचपन मिनट पर जेल से छोड़ा गया और शहडोल भेजने के लिए बस में बैठाया गया। छात्र ने अपने परिचित को फोन कर बताया कि वह परीक्षा केंद्र पहुंच रहा है, लेकिन उसने जानबूझकर परीक्षा में भाग नहीं लिया। परीक्षा केंद्र में उसकी उपस्थिति की पुष्टि भी की गई है।











