इंटरनेट का उपयोग कर मशरूम खेती में सफलता हासिल करने वाला युवा
सागर जिले के मोनू तिवारी ने डिजिटल माध्यमों का सही इस्तेमाल कर खेती को लाभकारी व्यवसाय में बदलने का साहसिक कदम उठाया है। अपने घर के एक छोटे से कमरे से शुरू हुई यह यात्रा अब आर्थिक रूप से फायदेमंद दिशा में बढ़ रही है।
मशरूम उत्पादन में आत्मनिर्भरता और प्रशिक्षण का अभाव
मोनू तिवारी का कहना है कि उन्होंने मशरूम की खेती के लिए किसी भी संस्थान से प्रशिक्षण नहीं लिया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे यूट्यूब पर उपलब्ध वीडियो देखकर बारीकियों को सीखा। 10 नवंबर से उन्होंने इस प्रयोग को शुरू किया।
मशरूम की खेती से मिली सफलता और बाजार में प्राप्त प्रतिक्रिया
मोनू ने बताया कि इस खेती में 30 से 40 दिनों में फसल तैयार हो जाती है। इसकी फुटकर कीमत 350 से 400 रुपये प्रति किलो है, जबकि थोक में यह 150 से 200 रुपये प्रति किलो बिक रही है। अभी तक उन्होंने लगभग 10 किलो मशरूम का उत्पादन किया है, जिसे जबलपुर (Jabalpur), दमोह (Damoh), सागर (Sagar) और स्थानीय मंडियों में सैंपल के रूप में भेजा गया है। जबलपुर में इसकी गुणवत्ता को मान्यता मिली है।









