मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव का सियासी खेल तेज
मध्य प्रदेश में तीन राज्यसभा सीटों के लिए हो रहे चुनाव ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। पहले माना जा रहा था कि बीजेपी की दो और कांग्रेस की एक सीट सुनिश्चित है, लेकिन अब स्थिति बदलती नजर आ रही है। बीजेपी ने तीसरे उम्मीदवार के रूप में महेश केवट (Mahesh Kewat) को मैदान में उतारकर कांग्रेस की प्रमुख उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन (Meenakshi Natarajan) की चिंता बढ़ा दी है। इस कदम ने दोनों पक्षों के बीच सियासी तनाव को और बढ़ा दिया है।
राज्यसभा चुनाव का नंबर गेम और राजनीतिक समीकरण
मध्य प्रदेश की विधानसभा में कुल 230 सदस्य हैं, जिनमें से वर्तमान में 228 ही सक्रिय हैं। बीजेपी के पास 164 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के पास 64 विधायक हैं। एक सीट जीतने के लिए किसी भी उम्मीदवार को कम से कम 58 वोटों की आवश्यकता होती है। बीजेपी की दो सीटें पहले ही पक्की मानी जा रही थीं, लेकिन तीसरे उम्मीदवार के मैदान में आने से चुनाव का समीकरण बदल गया है। बीजेपी को दो सीटें जीतने के लिए 116 वोट चाहिए, जबकि कांग्रेस एक सीट आसानी से जीत सकती है।
बीजेपी का तीसरा उम्मीदवार महेश केवट (Mahesh Kewat) मैदान में उतरने के बाद स्थिति जटिल हो गई है। पार्टी का यह कदम संकेत देता है कि वह अपने समर्थकों का समर्थन हासिल करने या क्रॉस वोटिंग के जरिए अंतिम परिणाम को प्रभावित करने का प्रयास कर रही है। वहीं, कांग्रेस के पास 62 वैध वोट हैं, लेकिन उसके उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन (Meenakshi Natarajan) की जीत को लेकर संशय बना हुआ है।
क्रॉस वोटिंग का खतरा और सियासी तनाव
मध्य प्रदेश का राज्यसभा चुनाव अब एक जटिल खेल में बदल गया है, जिसमें वोटिंग के दिन से ही क्रॉस वोटिंग का खतरा मंडरा रहा है। बीजेपी का तीसरा उम्मीदवार उतारना उसकी प्रभावशाली उपस्थिति बढ़ाने की रणनीति है, जबकि कांग्रेस के लिए यह अपनी पार्टी को एकजुट रखने और सीट को सुरक्षित करने का परीक्षा है। कांग्रेस के पास 64 विधायक हैं, लेकिन कुछ विधायकों की अयोग्यता और बगावत के कारण उसकी स्थिति कमजोर हो गई है।
कांग्रेस ने अपनी करीबी नेता मीनाक्षी नटराजन (Meenakshi Natarajan) को मैदान में उतारा है, लेकिन इस फैसले से पार्टी में असंतोष और क्रॉस वोटिंग का खतरा बढ़ गया है। इस चुनाव में कांग्रेस के विधायकों की संख्या घटने और बगावत की आशंका ने सियासी माहौल को और गर्म कर दिया है।
मध्य प्रदेश की राजनीति में इस तरह के सियासी खेल नए नहीं हैं। 2020 में भी इसी तरह की स्थिति देखी गई थी, जब क्रॉस वोटिंग ने पूरे देश की राजनीति को हिला कर रख दिया था। इस बार भी महेश केवट के मैदान में आने से यह चुनाव सबसे दिलचस्प मुकाबलों में से एक बन गया है।











