बारामती विमान दुर्घटना में शांभवी पाठक की जान गई
बारामती में हुए विमान हादसे में शांभवी पाठक, जो ग्वालियर से गहरा संबंध रखती थीं, का निधन हो गया। एयरफोर्स अधिकारी की बेटी होने के नाते, उन्होंने देश के कई शीर्ष पायलटों को आसमान की सैर कराई, लेकिन नियति ने उन्हें कुछ और ही मंजिल दिखाई।
शांभवी का जीवन और उड़ान का सपना
शांभवी का बचपन से ही होनहार व्यक्तित्व था। शुरुआत में उनका चयन इंजीनियरिंग के लिए हुआ था, लेकिन उनके पिता के एयरफोर्स में होने के कारण उनका मन मशीनों से नहीं, बल्कि आकाश में उड़ान भरने का था। उन्होंने इंजीनियरिंग छोड़कर पायलट बनने का कठिन मार्ग चुना। 2016 से 2018 के बीच उन्होंने ग्वालियर एयरफोर्स के नंबर-1 स्कूल से प्राथमिक शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद दिल्ली के एयर फोर्स बाल भारती स्कूल में उच्च शिक्षा ली। उन्होंने न्यूजीलैंड से पायलट ट्रेनिंग की और मध्य प्रदेश फ्लाइंग क्लब की सदस्य रहकर उड़ान की बारीकियों को सीखा।
परिवार और अंतिम संदेश
ग्वालियर के वसंत विहार (D-61) में रहने वाली उनकी दादी मीरा पाठक का दिल टूट गया है। हादसे के दिन सुबह 6:40 बजे शांभवी ने अपनी दादी को आखिरी बार ‘Good Morning दादू’ संदेश भेजा था। वह अपनी दादी को प्यार से ‘दादू’ कहती थीं। परिवार में उनका निकनेम ‘चीनी’ था, जो उनके मिलनसार स्वभाव और होनहार व्यक्तित्व को दर्शाता है। दादी ने बताया कि शांभवी अक्सर वीआईपी व्यक्तियों के साथ उड़ान भरती थीं और वह मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की कार्यशैली से बहुत प्रभावित थीं। उनके पिता विक्रम पाठक भारतीय वायुसेना (IAF) में अधिकारी हैं, और वर्तमान में दिल्ली के के सफदरजंग एन्क्लेव में रहते हैं। वायुसेना की अनुशासनप्रिय परवरिश में पली-बढ़ी शांभवी ने हमेशा चुनौतीपूर्ण कार्यों को चुना। अब घर का आंगन सूना हो गया है, लेकिन उनकी यादें परिवार के दिलों में जीवित हैं।









