मध्यप्रदेश में छात्रा की आत्महत्या: NEET परीक्षा का असर
मध्यप्रदेश के नवगठित जिले मऊगंज के मगनिया गांव की एक छात्रा ने घर में लगे पंखे से फांसी लगाकर अपनी जान दे दी। परिजनों का आरोप है कि आकांक्षा चतुर्वेदी NEET की तैयारी कर रही थी और उसे उम्मीद थी कि वह इस बार परीक्षा में अच्छा स्कोर करेगी। हालांकि, परीक्षा के पेपर लीक होने और रद्द होने के बाद वह मानसिक तनाव में आ गई थी, जिससे उसने यह खौफनाक कदम उठाया।
आर्थिक संघर्ष और पढ़ाई का संघर्ष
आकांक्षा के परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य से बेहतर नहीं थी, फिर भी उसके पिता ने बेटी की पढ़ाई के लिए क्रेडिट कार्ड से तीन लाख रुपये का लोन लिया था। परिवार ने उसे नागपुर के एक निजी कोचिंग सेंटर में तैयारी कराई, जहां वह NEET की परीक्षा की तैयारी कर रही थी। पिता कृष्ण कुमार चतुर्वेदी किसान थे, लेकिन बेटी की पढ़ाई के लिए नागपुर में कुक की नौकरी करने लगे थे। उन्हें भरोसा था कि बेटी इस बार सफल होगी और डॉक्टर बनेगी, लेकिन पेपर लीक होने के बाद वह डिप्रेशन में चली गई। इस घटना ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया।
सरकार और राजनीतिक प्रतिक्रिया
इस दुखद घटना को लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सरकार पर निशाना साधा है। एक ट्विट में उन्होंने लिखा कि बेटी की मौत का जिम्मेदार परीक्षा प्रणाली में खामियां हैं। साथ ही, एक सुसाइड नोट भी मिला है जिसमें आकांक्षा ने लिखा कि वह दोबारा NEET का पेपर नहीं देना चाहती क्योंकि उसे भरोसा नहीं है कि परीक्षा सही तरीके से होगी। उसने माफी मांगी और कहा कि उसने अपने माता-पिता को बर्बाद कर दिया।
NEET UG 2026 परीक्षा रद्द होने के बाद देशभर के लाखों अभ्यर्थियों को बड़ा झटका लगा है। 3 मई को आयोजित परीक्षा के बाद ही पेपर लीक की आशंका जताई जा रही थी। NTA (National Testing Agency) के अनुसार, 7 मई को परीक्षा में अनियमितताओं की जानकारी मिली, जिसके बाद केंद्रीय एजेंसियों को जांच सौंप दी गई। 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी गई और फिर 15 मई को नई परीक्षा का ऐलान किया गया। इस मामले की जांच CBI (Central Bureau of Investigation) कर रही है, और अब तक 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
सुप्रीम कोर्ट में भी इस मामले को लेकर नई याचिकाएं दाखिल हो रही हैं, और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग तेज हो रही है। विशेष रूप से कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) को लागू करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। वहीं, लीक नेटवर्क से जुड़े सदस्यों पर जांच एजेंसियां और कानून का शिकंजा कसते जा रहे हैं।











