मध्यप्रदेश का अनमोल नूरजहां आम: विश्व स्तर पर प्रसिद्ध
मध्यप्रदेश की आदिवासी बहुल आलीराजपुर जिले में उगने वाला नूरजहां आम अपने विशाल आकार, अद्भुत मिठास और सुगंध के कारण पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। यदि भारत में आमों का राजा कहा जाए, तो यह खास प्रजाति अपने अनूठे गुणों के कारण ‘किंग ऑफ मैंगो’ और ‘लक्जरी मैंगो’ का दर्जा प्राप्त कर चुकी है। इस आम की खासियतें इसकी सीमित उपलब्धता और उच्च गुणवत्ता हैं, जो इसे खास बनाती हैं।
विशेषताएँ और उत्पादन की सीमाएँ
यह आम अपने आकार और वजन में सामान्य आमों से अलग है। जहां आमतौर पर कुछ सौ ग्राम का होता है, वहीं नूरजहां आम का वजन 2 से 5 किलो तक हो सकता है। इसकी विशालकाय बनावट इतनी प्रभावशाली है कि एक ही फल पूरे परिवार की खुराक के लिए पर्याप्त होता है। इसकी दुर्लभता के कारण इसकी कीमत भी बहुत अधिक है, जो बाजार में 1500 से 3000 रुपये प्रति फल तक पहुंच जाती है।
इसके पेड़ बहुत कम संख्या में फल देते हैं, जिससे इसकी उपलब्धता सीमित हो जाती है। पकने से पहले ही बड़े-बड़े रईस और शौकीन इसकी अग्रिम बुकिंग कर लेते हैं। इसकी गूदा रसीला, कम रेशेदार और शाही सुगंध से भरपूर होता है, जो इसे अन्य आमों से अलग बनाता है। इस विशेषता के कारण नूरजहां आम को 1999 और 2010 में राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित भी किया गया है।
आयात और खेती का इतिहास
माना जाता है कि नूरजहां आम की यह दुर्लभ प्रजाति मूल रूप से अफगानिस्तान (Afghanistan) की है। दशकों पहले यह भारत पहुंची और 1950-60 के दशक में मध्यप्रदेश के मालवा क्षेत्र और आदिवासी इलाकों जैसे झाबुआ और आलीराजपुर में फली-फूली। जूना कट्ठीवाड़ा के किसान भरतराजसिंह जादव बताते हैं कि उनके पिता ने गुजरात के बनमाह क्षेत्र से इस पौधे को लाकर इसकी खेती शुरू की थी। उन्होंने मेहनत से इसे अपने क्षेत्र की मिट्टी में रोपा, जिससे यह क्षेत्र की पहचान बन गया। आज उनके पास 20-25 वर्ष पुराने मुख्य पेड़ और नए ग्राफ्टेड पौधे भी मौजूद हैं।











