धार की भोजशाला विवाद में एएसआई की रिपोर्ट का खुलासा
धार की प्रसिद्ध भोजशाला को लेकर चल रहे विवाद में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की नई वैज्ञानिक रिपोर्ट ने हलचल मचा दी है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि इस स्थल पर परमार काल के एक विशाल मंदिर का अस्तित्व था, और इसके अवशेष वर्तमान संरचना के निर्माण में उपयोग हुए हैं। रिपोर्ट में इस ऐतिहासिक स्थल की पुरानी संरचनाओं और वास्तुशिल्प विशेषताओं का विस्तृत विश्लेषण किया गया है।
रिपोर्ट में मिले पुरातात्विक प्रमाण और ऐतिहासिक संकेत
एएसआई की रिपोर्ट के अनुसार, इस परिसर में पुरातात्विक अवशेष जैसे मूर्तिकला के टुकड़े, शिलालेख, और साहित्यिक ग्रंथों वाले स्लैब पाए गए हैं। इन सबूतों से संकेत मिलता है कि यह स्थान पहले एक महत्वपूर्ण शैक्षिक और धार्मिक केंद्र रहा है। वैज्ञानिक जांच से पता चला है कि इस संरचना का निर्माण 10वीं-11वीं शताब्दी के परमार काल में हुआ था। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि वर्तमान इमारत बेसाल्ट की पुरानी संरचना के ऊपर बनाई गई है, जिसमें पुराने मंदिरों के स्तंभ और दीवारें पुनः उपयोग में लाई गई हैं।
मूर्तियों, शिलालेखों और सिक्कों का महत्व
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि परिसर में हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियों, धार्मिक प्रतीकों, और संस्कृत व प्राकृत भाषाओं के शिलालेखों की मौजूदगी पाई गई है। इन शिलालेखों में अरबी और फारसी के संकेत भी हैं। इसके अलावा, इस स्थल से 31 पुरातात्विक सिक्के मिले हैं, जिनमें से सबसे पुराने परमार राजाओं के समय के हैं, जब धार उनकी राजधानी थी। इन सबूतों से इस स्थल की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता का पता चलता है।











