मध्य प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण और गैस त्रासदी का स्मरण
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 1984 की भोपाल गैस त्रासदी को प्रकृति के साथ छेड़छाड़ का सबसे बड़ा उदाहरण बताया है। उन्होंने कहा कि इस भयानक दुर्घटना ने नागरिकों और पर्यावरण दोनों को भारी नुकसान पहुंचाया। मुख्यमंत्री ने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में भाग लेते हुए ‘एक पेड़ मां के नाम 2.0’ अभियान की शुरुआत की।
भोपाल गैस त्रासदी का स्थायी प्रभाव और निपटारा
सीएम यादव ने बताया कि उनकी सरकार ने 40 साल बाद यूनियन कार्बाइड (Union Carbide) की फैक्ट्री में पड़े जहरीले कचरे का सफलतापूर्वक निपटारा कर दिया है। उन्होंने कहा, “इस कदम से भोपाल की धरती से गैस त्रासदी का कलंक मिट गया है। अब हम यूनियन कार्बाइड की जमीन का सही प्रबंधन कर रहे हैं।” ज्ञात हो कि 2-3 दिसंबर 1984 की रात को भोपाल में इस फैक्ट्री से मिथाइल आइसोसाइनेट गैस का रिसाव हुआ था, जिसमें कम से कम 5479 लोगों की मौत हुई और हजारों लोग अपंग हो गए। इसे विश्व की सबसे भीषण औद्योगिक त्रासदियों में गिना जाता है।
हरित ऊर्जा और वन्यजीव संरक्षण की दिशा में प्रयास
मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि राज्य में स्वच्छ और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण पहल की जा रही हैं। सौर, पवन, बायोमास और जलविद्युत परियोजनाओं पर तेजी से काम चल रहा है, जिनमें सांची, खजुराहो जैसी जगहें शामिल हैं। साथ ही, उन्होंने पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। यादव ने बताया कि तेंदुओं के साथ-साथ असम से जंगली भैंसें भी लायी गई हैं, ताकि प्राकृतिक जीवन का संरक्षण किया जा सके। उन्होंने कहा, “सनातन संस्कृति में पेड़ को दस पुत्रों के समान माना जाता है। पर्यावरण संरक्षण हमारी जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा है।” उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राज्य सरकार जल गंगा अभियान के तहत नदियों, कुओं और तालाबों के संरक्षण में जुटी है।











