मुख्यमंत्री ने जल सुनवाई को अनिवार्य बनाने की घोषणा की
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यह स्पष्ट किया है कि प्रदेशभर में हर मंगलवार को जल सुनवाई का आयोजन किया जाएगा। यह निर्णय शनिवार शाम को मुख्यमंत्री निवास में हुई उच्चस्तरीय बैठक में लिया गया, जिसमें उन्होंने निर्देश दिए कि जल सुनवाई को केवल औपचारिकता नहीं बल्कि जनता के जीवन से जुड़ा गंभीर मुद्दा माना जाए। इस योजना के तहत नगर निगम, नगर पालिका, नगर परिषद, जिला पंचायत, जनपद पंचायत और ग्राम पंचायत स्तर तक जल सुनवाई अनिवार्य होगी।
जल संरक्षण के लिए रोबोट तकनीक का पहली बार प्रयोग
पेयजल व्यवस्था को मजबूत बनाने के उद्देश्य से सरकार ने पहली बार लीकेज डिटेक्शन के लिए रोबोट तकनीक का इस्तेमाल करने का फैसला किया है। इस नई तकनीक का मकसद पानी की बर्बादी को रोकना और सीवेज मिश्रण जैसी समस्याओं का समय रहते पता लगाना है। इससे न केवल जल संरक्षण में मदद मिलेगी बल्कि जल स्रोतों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।
स्वच्छ जल अभियान के दो चरणों में संचालन का प्लान
बैठक में यह भी बताया गया कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में जल टैंकों और शोधन यंत्रों की निगरानी और सफाई के लिए ‘स्वच्छ जल अभियान’ चलाया जाएगा। यह अभियान दो चरणों में चलेगा। पहला चरण 10 जनवरी से 28 फरवरी तक और दूसरा 1 मार्च से 31 मई तक आयोजित किया जाएगा। इस दौरान सभी जल शोधन यंत्रों और पेयजल टंकियों की सफाई की जाएगी। निगरानी के लिए GIS मैप आधारित ऐप का उपयोग किया जाएगा, जिससे पानी और सीवेज पाइपलाइनों की मैपिंग की जाएगी। साथ ही, इंटर-कनेक्शन पॉइंट्स की पहचान कर लीकेज की गहन जांच भी की जाएगी।











