इंदौर के मेजर हमजा आरिफ का दुखद निधन
हाथों की मेहंदी अभी भी उतरी नहीं थी, जब शादी की खुशियों के बीच नए जीवन की शुरुआत हुई थी। महज एक महीने पहले ही इंदौर में शादी की रस्में पूरी हुई थीं और घर में नई उमंगें थीं। लेकिन किस्मत ने कुछ और ही मंजूर किया। जिस घर की दहलीज पर दुल्हन के कदम पड़े थे, वहां अब इंदौर का युवा मेजर हमजा आरिफ तिरंगे में लिपटकर अंतिम विदाई लेने के लिए लौट रहे हैं।
जैसलमेर में दर्दनाक सड़क हादसा और सेना का शोक
यह हृदयविदारक घटना राजस्थान के जैसलमेर की है, जहां गुरुवार रात को हुए एक भीषण सड़क दुर्घटना ने एक खुशहाल परिवार और पूरे शहर को गहरे शोक में डुबो दिया। इंदौर के धनवंतरी नगर निवासी 30 वर्षीय हमजा आरिफ एक होनहार युवा थे। उन्होंने 2016 में इंदौर के चमेली देवी कॉलेज से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की थी, लेकिन उनके सपने केवल इंजीनियरिंग तक सीमित नहीं थे। उन्होंने देश सेवा का मार्ग चुना और 2017 में NDA की कठिन परीक्षा पास कर भारतीय सेना में अधिकारी बने।
सड़क पर अचानक आए ऊंट से टकराने का दर्दनाक हादसा
गुरुवार रात लगभग 12:30 बजे, जब मेजर हमजा आरिफ अपनी टाटा सफारी में जैसलमेर मिलिट्री स्टेशन लौट रहे थे, तभी अचानक सड़क पर एक ऊंट आ गया। तेज रफ्तार और अंधकार में कार नियंत्रण से बाहर हो गई और ऊंट से टकरा गई। इस भीषण टक्कर में कार पांच बार पलटी और करीब 100 मीटर तक घिसटती चली गई। हादसे में ऊंट की भी मौके पर ही मौत हो गई, जबकि वाहन के परखच्चे उड़ गए।
घटना के तुरंत बाद सेना के जवान और अधिकारी मौके पर पहुंचे। घायल तीनों अधिकारियों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने मेजर हमजा आरिफ को बचाने का प्रयास किया, लेकिन गंभीर चोटों के कारण उन्होंने दम तोड़ दिया। दोनों घायल लेफ्टिनेंट अधिकारियों का उपचार जारी है। मृतक मेजर का शव पोस्टमार्टम के लिए जैसलमेर के अस्पताल में रखा गया है।
यह हादसा उस स्थान पर हुआ है, जहां एक साल पहले ही एक प्राइवेट बस में भीषण आग लगने से 29 यात्रियों की दर्दनाक मौत हो चुकी है।
इंदौर में शोक की लहर और परिवार का दुख
मेजर हमजा आरिफ के असमय निधन की खबर जैसे ही उनके गृह नगर इंदौर पहुंची, हर आंख नम हो गई। उनके घर धनवंतरी नगर में सन्नाटा छा गया, जहां महज एक महीने पहले तक खुशियों का माहौल था। शुक्रवार को क्षेत्रीय विधायक और पार्षद उनके घर पहुंचे और परिजनों को सांत्वना दी। उन्होंने इस कठिन समय में हर संभव मदद का भरोसा दिलाया।
मेजर हमजा आरिफ एक होनहार अधिकारी, समर्पित पुत्र और महज एक महीने पहले ही जीवनसाथी बने थे। उन्होंने देश के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए हैं। उनका यह बलिदान और अंतिम संस्कार पूरे देश में सम्मान के साथ याद किया जाएगा, और उनकी यादें हमेशा दिलों में जीवित रहेंगी।











