मध्य प्रदेश के मैहर वनमंडल में आतंक का पर्याय बना जंगली हाथी आखिरकार घर लौटा
पिछले 22 दिनों से मैहर वनमंडल में आतंक का प्रतीक बने नर जंगली हाथी ‘E-5’ ने अंततः अपने घर वापस आकर वन विभाग और स्थानीय लोगों की चिंता को समाप्त कर दिया है। इस हाथी ने अपनी ताकत और चपलता का प्रदर्शन कर दिखाया कि उसे नियंत्रित करना आसान नहीं है।
हाथी का उत्पात और वन विभाग की कोशिशें
7 और 8 सितंबर की मध्यरात्रि में बाणसागर (Bansagar) डैम को पार कर अमरपाटन (Amarpatan) रेंज में प्रवेश करने के बाद, इस हाथी ने मैहर के मोहारी गांव में जमकर उत्पात मचाया। उसने मकानों को क्षतिग्रस्त कर दिया और खेत में खड़ी फसलों को तहस-नहस कर दिया। साथ ही, खेत में खड़े किसान छेदी यादव को पटककर मौत के घाट उतार दिया। इस भयावह घटना के बाद, हाथी ने गोरसरी पहाड़ के घने जंगलों को अपना मुख्य ठिकाना बना लिया। दिनभर छिपने के बाद, शाम को वह आबादी वाले इलाकों में घुसकर फसलों और घरों को नुकसान पहुंचाता रहा।
असफल रेस्क्यू प्रयास और अंतिम वापसी
हाथी को पकड़ने के लिए वन विभाग ने 23 सितंबर को एक बड़ा मेगा रेस्क्यू अभियान चलाया। इसमें बांधवगढ़ (Bandhavgarh) से छह कुमकी (Kumki) हाथियों जैसे रामा, सूर्या, श्याम, लक्ष्मण को बुलाया गया। भारी मशीनरी और क्रेन की मदद से लगभग 150 वनकर्मियों ने मिलकर इस आक्रामक हाथी को ट्रेंकुलाइज करने का प्रयास किया, लेकिन सभी प्रयास असफल रहे।
27 सितंबर की रात करीब 10 बजे, यह हाथी गोरसरी (Gorasi) से निकलकर रामनगर (Ramnagar) के शहरी क्षेत्र में घुस गया। स्थानीय लोगों में हड़कंप मच गया और उन्होंने हॉर्न बजाकर या शोर मचाकर उसे खदेड़ने का प्रयास किया। इसके बाद, यह हाथी हरदुआ, गंजाल, पुरैना और मड़करा होते हुए मैहर कैंप पहुंचा। 28 सितंबर की सुबह लगभग 6 बजे, यह बाणसागर डैम के जल में उतर गया।
पानी में तैरते हुए, इस हाथी ने करीब 5 किलोमीटर तक तैरकर ब्योहारी (Byohari) के जंगलों में सुरक्षित स्थान पाया। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस दुर्लभ वीडियो में हाथी को पानी में तैरते देखा जा सकता है, जिसने पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।
इस तरह, हाथी के इस प्रकार डैम पार कर वापस लौटने के साथ ही, पिछले तीन हफ्तों से फैले खौफ का माहौल समाप्त हो गया है। स्थानीय लोग और वन विभाग दोनों ही इस राहत की सांस ले रहे हैं।









