दिल्ली कोर्ट ने महिला की गरिमा का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति को दोषी ठहराया
दिल्ली के तीस हजारी न्यायालय ने एक महिला की निष्ठा और उसकी गरिमा का अपमान करने वाली टिप्पणी को सामान्य सवाल नहीं माना है, बल्कि इसे महिला के प्रति यौन अपमानजनक संकेत माना है। अदालत ने गिरधारी लाल को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 509 के तहत दोषी करार दिया है, जो महिला की शालीनता का उल्लंघन करने वाले शब्दों या कृत्यों से संबंधित है। इस मामले में अभी उसकी सजा का निर्णय नहीं हुआ है।
मामले का संक्षिप्त विवरण और कोर्ट का निर्णय
यह घटना 23 मार्च 2021 की है, जब महिला अपनी तीन वर्षीय बेटी के साथ घर के बाहर से गुजर रही थीं। वह अपनी बेटी को उसके पिता के पास छोड़ने जा रही थीं, और उस समय बच्ची रो रही थी। महिला ने उसे शांत करने के लिए कहा, “देखो पापा आ गए, डू नॉट क्राई।” इसी दौरान, इलाके में कपड़ों पर प्रेस करने का काम करने वाला गिरधारी लाल सड़क के किनारे बैठा था। महिला के इस वाक्य के तुरंत बाद उसने टिप्पणी की, “कौन से वाले पापा?” महिला ने इस टिप्पणी को नजरअंदाज कर दिया, लेकिन बाद में उसने अपने ससुर को इस घटना के बारे में बताया। इसके बाद, उसके ससुर ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
अदालत ने पाया कि गिरधारी लाल ने स्वयं स्वीकार किया कि उसने यह शब्द कहे थे, हालांकि उसने कहा कि उसका कोई गलत इरादा नहीं था। कोर्ट ने आरोपी के बयान को भी ध्यान में रखा, जिसमें उसने माना कि उसने टिप्पणी की थी। अदालत ने कहा कि किसी टिप्पणी की मंशा हमेशा स्पष्ट नहीं होती, बल्कि उसे उस समय की परिस्थितियों और संदर्भ से समझना चाहिए।
अदालत का निष्कर्ष और सजा का भविष्य
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस घटना में ऐसी कोई परिस्थिति नहीं मिली जिससे इस टिप्पणी का कोई सामान्य या निर्दोष अर्थ निकाला जा सके। अदालत ने माना कि यह टिप्पणी महिला की गरिमा और शालीनता को ठेस पहुंचाने वाली थी। इस आधार पर, गिरधारी लाल को IPC की धारा 509 के तहत दोषी ठहराया गया। यह धारा उन शब्दों या इशारों से संबंधित है, जिनका उद्देश्य किसी महिला की शालीनता का अपमान करना हो।
बचाव पक्ष ने स्वतंत्र गवाह की अनुपस्थिति का मुद्दा उठाया, लेकिन अदालत ने इसे अभियोजन के मामले पर संदेह करने का आधार नहीं माना। शिकायतकर्ता खुद घटना की प्रत्यक्ष गवाह थीं, और उनकी गवाही में कोई विरोधाभास नहीं पाया गया। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष ने साबित कर दिया कि आरोपी ने जानबूझकर यह टिप्पणी महिला को सुनाने के इरादे से की थी, ताकि उसकी शालीनता का अपमान किया जा सके।
अदालत ने गिरधारी लाल को दोषी करार दिया, लेकिन अभी उसकी सजा का ऐलान नहीं किया है। सजा का निर्णय अलग से लिया जाएगा, जिसमें आरोपी को अपनी बात रखने का मौका मिलेगा। इस तरह, महिला द्वारा अपने बच्चे के पिता की ओर इशारा करते हुए कही गई सामान्य बात का जवाब एक टिप्पणी के रूप में अदालत ने महिला की गरिमा का उल्लंघन माना है।










