मध्य प्रदेश का वन विभाग गिद्ध संरक्षण में नई मिसाल कायम कर रहा है
मध्य प्रदेश का वन विभाग अब केवल बाघों के संरक्षण के लिए ही नहीं, बल्कि गिद्धों के संरक्षण में भी विश्व स्तर पर अपनी पहचान बना रहा है। हाल ही में, केरवा स्थित गिद्ध संरक्षण प्रजनन केंद्र (VCBC) में इलाज के बाद स्वस्थ हुए दो सिनेरियस गिद्धों ने अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर वैज्ञानिक समुदाय को चौंका दिया है।
गिद्धों का लंबा सफर और संरक्षण प्रयास
दरअसल, दिसंबर 2025 में विदिशा के सिरोंज से एक घायल सिनेरियस गिद्ध को बचाया गया था। वन विभाग के विशेषज्ञों ने भोपाल के वन विहार और BNHS के सहयोग से इस गिद्ध का उपचार किया। इसके बाद, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इसे 23 फरवरी को हलाली बांध क्षेत्र में स्वतंत्र किया। इस पर GPS उपकरण लगाया गया था, जिसकी मदद से यह गिद्ध 10 अप्रैल को उड़ान भरकर राजस्थान, पाकिस्तान और अफगानिस्तान को पार करते हुए 4 मई को उज्बेकिस्तान पहुंच गया। विदिशा से उज्बेकिस्तान तक का यह 3000 किलोमीटर का सफर हर किसी के लिए आश्चर्यजनक है।
अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर गिद्ध का सुरक्षित रेस्क्यू
शाजापुर के सुसनेर से रेस्क्यू की गई मादा सिनेरियस गिद्ध का भी उल्लेखनीय मामला है। 25 मार्च को रिहा होने के बाद यह गिद्ध पाकिस्तान पहुंच गई। 7 अप्रैल को वहां आई भीषण ओलावृष्टि और तूफान के कारण यह उड़ने में असमर्थ हो गई और जमीन पर गिर गई। इस स्थिति में, पाकिस्तान के अधिकारियों ने तुरंत ही इस घायल गिद्ध का रेस्क्यू किया और पंजाब प्रांत के खानेवाल जिले में सुरक्षित रख लिया। वर्तमान में, यह वल्चर सेंटर में स्वस्थ हो रही है।
इस पूरी प्रक्रिया में GPS और माइक्रोचिप की मदद से वन विभाग इन गिद्धों की रीयल-टाइम निगरानी कर रहा है। अधिकारियों का मानना है कि यह लंबी यात्राएं गिद्धों की अद्भुत दिशा-ज्ञान क्षमता और सहनशक्ति का प्रमाण हैं। इससे पहले, 2025 में ही एक यूरेशियन ग्रिफॉन गिद्ध कजाकिस्तान तक 4300 किलोमीटर की यात्रा कर भारत लौट आया था।
सिनेरियस गिद्ध एशिया और यूरोप की सबसे बड़ी पक्षी प्रजातियों में से एक हैं, जो वन ईकोसिस्टम की सफाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनकी संरक्षण गतिविधियों से न केवल इन पक्षियों का जीवन सुरक्षित हो रहा है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण का भी एक बड़ा उदाहरण बन रहा है।









