मध्य प्रदेश में चीता पुनर्स्थापना परियोजना का सफल क्रियान्वयन
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बोत्सवाना (Botswana) से लाए गए दो चीतों को उनके क्वारंटाइन अवधि पूरी होने के बाद कूनो नेशनल पार्क (Kuno National Park) के खुले जंगल में छोड़ दिया है। इस महत्वपूर्ण कदम के साथ ही राज्य ने अपने वन्यजीव संरक्षण प्रयासों को नई दिशा दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नाइजीरिया (Nigeria), दक्षिण अफ्रीका (South Africa) और अब बोत्सवाना से लाए गए इन चीतों को फिर से बसाने का कार्य निरंतर सफलता की ओर बढ़ रहा है, जिससे मध्य प्रदेश को ‘चीता राज्य’ के रूप में देशभर में पहचान मिली है।
प्रोजेक्ट चीता के तहत नई शुरुआत और संरक्षण का मिशन
सीएम यादव ने कूनो नदी के किनारे एक विशेष स्थान पर मादा चीतों CCV-2 और CCV-3 को छोड़ा, जिससे इस परियोजना को और गति मिलेगी। यह कदम भारत के वन्यजीव संरक्षण के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ने के साथ ही, प्रोजेक्ट चीता के उद्देश्यों को भी मजबूत करेगा। इस परियोजना का मुख्य लक्ष्य लुप्तप्राय प्रजातियों को पुनः स्थापित करना, उनकी संख्या बढ़ाना और उन्हें खुले वातावरण में शिकार करने तथा स्वतंत्र रूप से घूमने के लिए तैयार करना है।
बढ़ती चीतों की संख्या और वैश्विक संरक्षण प्रयास
बता दें कि फरवरी में बोत्सवाना से लाए गए नौ चीतों को छोटे बाड़ों में रखा गया था ताकि वे स्थानीय पर्यावरण के साथ तालमेल बिठा सकें। अब इन चीतों ने अपना क्वारंटाइन पीरियड पूरा कर लिया है। एक अधिकारी ने बताया कि इन चीतों के आने से भारत में कुल चीतों की संख्या बढ़कर 57 हो गई है, जिसमें देश में जन्मे शावक भी शामिल हैं। यह ‘प्रोजेक्ट चीता’ का तीसरा बड़ा अंतरराष्ट्रीय चरण है, जिसमें पहले नामीबिया (Namibia) से आठ और दक्षिण अफ्रीका (South Africa) से बारह चीते लाए गए थे। विशेषज्ञों का मानना है कि बोत्सवाना से आए इन चीते में अधिक आनुवंशिक विविधता है, जो कूनो में स्वस्थ और स्थायी आबादी बनाने में मदद करेगा।









