मध्यप्रदेश में किसानों के हित में नई घोषणाएं और कृषि सुधार
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने प्रदेश की जनता को संबोधित करते हुए किसानों के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाओं और घोषणाओं की घोषणा की है। उन्होंने बताया कि रिकॉर्ड गेहूं उत्पादन को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने केंद्र सरकार से गेहूं खरीदी सीमा बढ़ाने का अनुरोध किया था, जिसे स्वीकार कर लिया गया है। अब गेहूं का उपार्जन लक्ष्य 78 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया है, जिससे किसानों को सीधा लाभ मिलेगा।
खरीदी व्यवस्था में सुधार और किसानों को लाभ
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि अब गेहूं की खरीदी सप्ताह में छह दिन होगी, जिससे किसानों को अपनी फसल बेचने में आसानी होगी। साथ ही, स्लॉट बुकिंग की अंतिम तिथि 9 मई तक बढ़ा दी गई है। इससे किसानों को अधिक समय मिलेगा और वे बिना किसी बाधा के अपनी फसल का उचित मूल्य प्राप्त कर सकेंगे। शनिवार का अवकाश समाप्त कर दिया गया है ताकि किसानों को निर्बाध रूप से अपनी फसल बेचने का अवसर मिल सके।
मुआवजा, बोनस और कृषि योजनाओं का विस्तार
सरकार ने भूमि अधिग्रहण पर किसानों को अब चार गुना अधिक मुआवजा देने का फैसला किया है, जो किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए एक ऐतिहासिक कदम है। इसके अलावा, समर्थन मूल्य पर उड़द की खरीदी के साथ ही किसानों को 600 रुपये प्रति क्विंटल का अतिरिक्त बोनस भी मिलेगा। सरसों की भावांतर योजना के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं, जिससे किसानों को MSP से अधिक दाम मिल रहे हैं। ‘किसान कल्याण वर्ष’ के तहत, किसानों को मात्र 5 रुपये में कृषि पंप कनेक्शन उपलब्ध कराए जा रहे हैं, और कृषक मित्र योजना के तहत 90 प्रतिशत सब्सिडी पर सोलर पंप भी दिए जा रहे हैं।
मध्यप्रदेश अब ‘मिल्क कैपिटल’ बनने की दिशा में अग्रसर है। पशुपालन और दुग्ध उत्पादन को मुख्य आय का स्रोत बनाने के लिए सरकार ने 1752 नई दुग्ध समितियों का गठन किया है। हर दिन प्रदेश में 10 लाख किलो दूध का संकलन हो रहा है, और दुग्ध उत्पादक किसानों को दूध का दाम 8 से 10 रुपये प्रति किलो अधिक मिल रहा है।
वहीं, वैश्विक युद्ध की स्थिति के बावजूद प्रदेश में यूरिया की कोई कमी नहीं है। वर्तमान में 5.90 लाख मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध है, जो पिछले वर्ष की तुलना में अधिक है। वितरण प्रणाली को डिजिटल और आधुनिक बनाने के प्रयास किए गए हैं, ताकि किसानों को बिना लंबी लाइनों के खाद मिल सके।









