इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी का मामला: जांच रिपोर्ट का खुलासा
मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल से हुई मौतों का मामला केवल एक लापरवाही का परिणाम नहीं है, बल्कि यह दशकों से चली आ रही कई गलतियों का नतीजा है। इस गंभीर मुद्दे की जांच के लिए गठित आयोग ने अपनी अंतिम रिपोर्ट में इन खामियों का खुलासा किया है।
आयोग की रिपोर्ट में प्रमुख दोष और सुझाव
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा गठित एक एकल सदस्यीय आयोग ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत की है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि क्षेत्र में पानी के नमूनों में ई. कोलाई और टोटल कोलीफॉर्म जैसे खतरनाक बैक्टीरिया पाए गए हैं, जो साफ तौर पर पेयजल की गुणवत्ता में गंभीर कमी दर्शाते हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दूषित पानी के कारण गैस्ट्रोएंटेराइटिस, उल्टी, दस्त और डिहाइड्रेशन जैसी बीमारियों का प्रकोप हुआ है।
सीवर और जल पाइपलाइन की खामियों का खुलासा
रिपोर्ट के अनुसार, भागीरथपुरा में 1990 से 1995 के बीच बिछाई गई सीवर लाइन और 1999 से 2004 के बीच स्थापित पेयजल पाइपलाइन मानकों के अनुरूप नहीं थीं। इन पाइपलाइनों में लीकेज और गलत बिछाने के कारण सीवर का दूषित पानी पेयजल में मिल सकता था। इस समस्या के कारण दिसंबर 2025 तक इस क्षेत्र में दूषित पानी की आपूर्ति जारी रही, जिससे कई लोग बीमार हुए और कुछ की मौत भी हुई।
आयोग ने इन खामियों के लिए नगर निगम और विकास प्राधिकरण की लापरवाही को भी जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि इन संस्थानों ने आवश्यक तकनीकी दस्तावेज और रिकॉर्ड समय पर उपलब्ध नहीं कराए, जिससे समस्या और जटिल हो गई। मृतकों के परिवारों को दस लाख रुपये का मुआवजा देने और भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचाव के लिए जल आपूर्ति व्यवस्था में सुधार का सुझाव भी रिपोर्ट में शामिल है।








