दिल्ली के सत्य निकेतन में हादसे का दुखद प्रभाव
कुछ समय पहले, इस घर में खुशियों का माहौल था, जब रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जा रहा था। घर का एकमात्र बेटा दिल्ली से अपने परिवार के पास आया था, और सभी उसकी वापसी पर खुश थे। बहन ने अपने भाई की कलाई पर राखी बांधी, और भाई ने उसे प्यार भरा जवाब दिया। कुछ ही दिनों बाद, वह अपने सपनों को पूरा करने के लिए फिर से दिल्ली लौट गया। लेकिन परिवार को क्या पता था कि यह विदाई अंतिम होगी, और अगली बार वह अपने पार्थिव शरीर के रूप में लौटेगा।
दुर्ग के युवराज सोनी की दुखद कहानी
यह कहानी छत्तीसगढ़ के दुर्ग (Durg) के रहने वाले युवराज सोनी (Yuvraj Soni) की है, जिसकी जिंदगी एक भयानक हादसे ने बदल दी। दिल्ली के सत्य निकेतन (Satya Niketan) में हुए इमारत गिरने के हादसे ने एक परिवार से उसका इकलौता बेटा छीन लिया। माता-पिता ने अपने बेटे के उज्जवल भविष्य का सपना देखा था, लेकिन अब वह इस दुनिया में नहीं है। जब दो दिन बाद युवराज का पार्थिव शरीर दिल्ली से दुर्ग पहुंचा, तो घर के बाहर लोगों की भीड़ थी, लेकिन घर के अंदर का सन्नाटा हर किसी को झकझोर रहा था। परिजनों की आंखों में उसकी यादें तैर रही थीं, और कुछ ही समय पहले वह रक्षाबंधन पर घर आया था, अपनी बहन को राखी बांधी थी, और परिवार के साथ समय बिताया था। फिर वह पढ़ाई के लिए दिल्ली लौट गया।
परिवार का दर्द और अंतिम विदाई
युवराज का परिवार उसकी पढ़ाई और भविष्य को लेकर आशान्वित था। वह दिल्ली विश्वविद्यालय (Delhi University) के मोतीलाल नेहरू कॉलेज (Motilal Nehru College) में बी.कॉम का छात्र था, और उसकी पढ़ाई अच्छी चल रही थी। परिवार को भरोसा था कि वह कुछ बड़ा करेगा और घर का नाम रोशन करेगा। लेकिन 6 सितंबर को आई एक खबर ने उनके सारे सपनों को चकनाचूर कर दिया। उस दिन दिल्ली के सत्य निकेतन में एक तीन मंजिला इमारत गिर गई, और इस हादसे में युवराज की मौत हो गई। परिवार को उम्मीद थी कि वह पढ़ रहा है, आगे बढ़ रहा है, और अपने भविष्य को संवार रहा है, लेकिन अब वह कभी फोन नहीं करेगा, घर नहीं आएगा, और मां-बाप से नहीं कहेगा कि उसकी पढ़ाई ठीक चल रही है। दो दिनों का इंतजार करने के बाद, दिल्ली से शव दुर्ग पहुंचा, और परिवार का सब्र टूट गया। युवराज का पार्थिव शरीर देखकर उसकी मां बिलख पड़ी, पिता बदहवास हो गए, और बहन लगातार रो रही थी, उस भाई को देखकर, जिसे उसने राखी बांधी थी।











