उज्जैन में हनुमान प्रतिमा को लेकर विवाद और प्रशासनिक प्रयास
उज्जैन के प्रसिद्ध हनुमान मंदिर में हाल ही में हुई घटनाओं ने धार्मिक आस्था और विकास के बीच टकराव को उजागर किया है। सिंहस्थ महाकुंभ 2028 की तैयारियों के दौरान सड़क चौड़ीकरण के कार्य के तहत मंदिर की दीवार और संरचना को हटाने का प्रयास किया गया, जिसमें खड़ी हनुमान जी की प्रतिमा को स्थानांतरित करने की कोशिशें तीन दिनों तक चलीं। हालांकि, जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अभी तक प्रतिमा को हटाने या स्थानांतरित करने का कोई प्रयास नहीं किया गया है।
मंदिर की स्थिति और श्रद्धालुओं का रुख
उज्जैन के कंठाल चौराहे से छत्री चौक तक चल रहे सड़क चौड़ीकरण कार्य के दौरान मंदिर का पुराना भवन और दीवारें तो हटा दी गईं, लेकिन हनुमान जी की प्रतिमा ज्यों की त्यों खड़ी रही। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रतिमा को हटाने का कोई प्रयास नहीं हुआ है और यह एक चमत्कार के रूप में देखा जा रहा है। इस घटना के बाद मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि हुई है, जिन्होंने प्रतिमा के संरक्षण और स्थान पर स्थिर रहने की मांग की है। संत समाज ने भी इस मुद्दे पर प्रशासन से संवाद कर समाधान निकालने का आग्रह किया है।
राजनीतिक और पुरातात्विक पहलू
इस विवाद में राजनीतिक दल भी सक्रिय हो गए हैं। कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने प्रतिमा को हटाने के विरोध में प्रदर्शन किया और मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की। उन्होंने प्रशासन पर जल्दबाजी का आरोप लगाते हुए प्रतिमा को वहीं रखने की मांग की। वहीं, पुरातत्व विभाग ने इस प्रतिमा की प्राचीनता का परीक्षण शुरू कर दिया है, जिसमें अनुमान है कि यह लगभग 1000 साल पुरानी हो सकती है। यदि यह सही साबित होती है, तो यह न केवल धार्मिक बल्कि ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व भी रखेगी।
सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के मद्देनजर शहर में सड़क और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने का काम जारी है। प्रशासन का लक्ष्य है कि विकास कार्य भी तेजी से पूरे हों और धार्मिक आस्था का सम्मान भी बना रहे। इस बीच, मंदिर में श्रद्धालुओं का उत्साह और आस्था बनी हुई है, और मंदिर परिसर में श्रद्धालु लगातार दर्शन कर रहे हैं।









