ग्वालियर में गर्भवती पत्नी का छुपाया जाना और भ्रूण हत्या का मामला
ग्वालियर जिले में एक अत्यंत संवेदनशील और चौंकाने वाला मामला प्रकाश में आया है, जिसमें आरोप है कि शादी से पहले ही पत्नी गर्भवती थी और इस तथ्य को छुपाया गया। इसके बाद ससुराल पक्ष की सहमति से गर्भपात कराई गई। इस पूरे प्रकरण में न्यायालय ने न्यायिक मजिस्ट्रेट को सभी दस्तावेजों और कथनों के आधार पर पुनर्विचार करने का आदेश दिया है।
पति ने लगाए गंभीर आरोप, गर्भवती पत्नी का छुपाना और गर्भपात
यह मामला ग्वालियर के एक निवासी पति विशाल माहौर से जुड़ा है, जिन्होंने अपनी पत्नी और उसके परिवार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत के अनुसार, शादी के समय ही पत्नी पहले से गर्भवती थी, जिसे जानबूझकर छिपाया गया। शादी के लगभग एक महीने बाद ही पत्नी की तबीयत बिगड़ी, जिसके बाद उसे डॉक्टर के पास ले जाया गया। अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में पता चला कि वह दो माह से अधिक गर्भवती थी।
गर्भपात और न्यायिक प्रक्रिया का वर्तमान स्थिति
आरोप है कि इस खुलासे के बाद पत्नी अपने मायके चली गई और वहां परिजनों के साथ मिलकर एक निजी अस्पताल में गर्भपात कराया गया। पति का कहना है कि यह स्पष्ट भ्रूण हत्या का मामला है और इसमें शामिल सभी जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। पहले इस मामले की शिकायत झांसी निवासी युवक ने जनकगंज थाने में दी थी, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। बाद में न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किया गया, जिसे 20 नवंबर 2025 को खारिज कर दिया गया।
अपर सत्र न्यायाधीश ने इस मामले की पुनरीक्षण याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि दस्तावेजों और कथनों की फिर से समीक्षा आवश्यक है। अदालत ने न्यायिक मजिस्ट्रेट को निर्देश दिया है कि वे सभी रिकॉर्ड का पुनः विश्लेषण कर उचित निर्णय लें। वर्तमान में इस मामले की अगली सुनवाई निचली अदालत में होनी है। यह मामला न केवल कानून बल्कि सामाजिक और नैतिक सवाल भी खड़ा करता है, और अब देखना है कि न्यायिक प्रक्रिया के बाद सच्चाई क्या सामने आती है और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है।











