मध्य प्रदेश में मूंग MSP पर खरीद को लेकर किसानों का आंदोलन तेज
मध्य प्रदेश में मूंग की पूरी फसल के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद की मांग को लेकर किसानों का आंदोलन लगातार बढ़ता जा रहा है। नर्मदापुरम से भोपाल तक मार्च कर पहुंचे किसानों ने राजधानी के सावरकर सेतु के पास डेरा डाल दिया है। इस बीच, राज्य सरकार ने केंद्र से हस्तक्षेप की अपील करते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखा है। वहीं, किसान अब मुख्यमंत्री आवास तक मार्च करने की योजना बना रहे हैं।
बढ़ते आंदोलन के बीच पुलिस व्यवस्था और सरकार की प्रतिक्रिया
भोपाल में MSP को लेकर चल रहे किसान आंदोलन के दौरान पुलिस ने कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त बल तैनात किया है। एसीपी आदित्य राज सिंह ने कहा कि कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की गई है और ट्रैफिक को सुगम बनाने के लिए डायवर्जन लागू किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बातचीत जारी है और आगे की कार्रवाई उनके निर्देशानुसार ही की जाएगी।
एक किसान ने कहा कि वे लोकतांत्रिक तरीके से मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने निकले हैं, लेकिन प्रशासन ने हर स्तर पर उन्हें रोकने का प्रयास किया। किसान की मुख्य मांगें मूंग की 100 प्रतिशत MSP पर खरीद और ई-टोकन व्यवस्था को खत्म करना हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार किसानों की छवि खराब करने की कोशिश कर रही है और वे किसी भी तरह की गड़बड़ी से बचेंगे। किसान ने स्पष्ट किया कि उनका मकसद सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाना या किसी अधिकारी को नुकसान पहुंचाना नहीं है। वे अपनी मांगों को मनवाने तक डटे रहेंगे।
किसानों की मुख्य मांगें और सरकार का जवाब
मध्य प्रदेश के कृषि मंत्री ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को लिखे पत्र में बताया है कि राज्य में 14 मई से 3 जुलाई 2026 के बीच लगभग 8.06 लाख मीट्रिक टन मूंग का उत्पादन हुआ है, जबकि अभी तक 4.54 लाख मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य तय किया गया है। मंत्री का कहना है कि वर्तमान लक्ष्य के कारण कई किसान MSP का लाभ नहीं ले पाएंगे।
किसानों का कहना है कि जब तक मूंग की 100 प्रतिशत MSP पर खरीद और खाद वितरण से जुड़ी उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक वे भोपाल में ही डटे रहेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार किसानों की छवि खराब करने की कोशिश कर रही है और उम्मीद है कि वे कोई गड़बड़ी करें ताकि उन्हें बदनाम किया जा सके। किसान ने यह भी कहा कि उनका मकसद सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाना या अधिकारियों को नुकसान पहुंचाना नहीं है। वे सरकार से अपील करते हैं कि उन्हें हर कदम पर रोका न जाए, क्योंकि वे अपनी मांगें मनवाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।









