मध्य प्रदेश में मानहानि मुकदमा: एक जटिल कानूनी प्रक्रिया
मध्य प्रदेश के चर्चित RTI कार्यकर्ता आशीष चतुर्वेदी पर ग्वालियर पुलिस की CSP हिना खान द्वारा दायर किया गया 50 करोड़ रुपये का मानहानि का मुकदमा अब प्रदेश के सबसे चर्चित और लंबित मामलों में से एक बन चुका है। यह मुकदमा 28 मार्च 2025 को दर्ज किया गया था, लेकिन सात महीने बीतने के बावजूद न तो अदालत में फीस जमा की गई है और न ही कोई बयान या गवाही पेश हुई है।
मुकदमे की स्थिति और कानूनी जटिलताएँ
कोर्ट के रिकॉर्ड्स के अनुसार, इस मुकदमे की कई तारीखें तय की गई हैं, लेकिन हर बार वादी पक्ष की गैरमौजूदगी या प्रक्रिया की अधूरी स्थिति के कारण कार्यवाही आगे नहीं बढ़ पाई है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि बिना कोर्ट फीस जमा किए मुकदमे को विधिवत रूप से आगे नहीं बढ़ाया जा सकता। इस मामले में यह भी चर्चा है कि मुकदमा केवल मीडिया में चर्चा बटोरने के लिए ही दायर किया गया था, लेकिन कानूनी प्रक्रिया पूरी न होने के कारण यह अधूरा ही रह गया है।
आरोप और राजनीतिक-सामाजिक संदर्भ
RTI कार्यकर्ता आशीष चतुर्वेदी का आरोप है कि यह मानहानि का मुकदमा उनकी आवाज दबाने की एक सोची-समझी रणनीति है। उनका दावा है कि उन्होंने पहले गंभीर मामलों जैसे सेक्सटॉर्शन और एक्सटॉर्शन को उजागर किया था, जिसके बाद उन पर दबाव बनाने के लिए यह झूठा मुकदमा दर्ज किया गया। उन्होंने कहा, “मेरे परिवार को परेशान किया गया ताकि मैं चुप हो जाऊं, लेकिन मैं पारदर्शिता और सच्चाई की लड़ाई छोड़ने वाला नहीं हूं।”
वहीं, ग्वालियर में पदस्थ CSP हिना खान पहले भी सुर्खियों में रह चुकी हैं। हाल ही में डॉ. भीमराव अंबेडकर मूर्ति विवाद के संदर्भ में सोशल मीडिया पर उनके और वकीट अनिल मिश्रा के बीच बहस और ‘जय श्रीराम’ के नारों को लेकर विवाद खड़ा हो गया था। यह मामला अब केवल कानूनी विवाद नहीं रह गया है, बल्कि यह नागरिक अधिकारों और सिस्टम के बीच संघर्ष का प्रतीक बन चुका है।
अभी यह देखना बाकी है कि यह मुकदमा प्रदेश के सबसे बड़े मानहानि दावे के रूप में इतिहास बनाएगा या फिर फीस जमा न करने के कारण यह एक अधूरा कानूनी मामला ही रह जाएगा।









