धार में भोजशाला को मंदिर घोषित करने के बाद मुख्यमंत्री की पहली पूजा
धार जिले में भोजशाला-कमाल मौला परिसर को मंदिर के रूप में मान्यता दिए जाने के बाद पहली बार मुख्यमंत्री मोहन यादव ने विधि-विधान से पूजा अर्चना की। इस अवसर पर उन्होंने उन तीन शहीदों के परिवारों को पांच-पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता का भी ऐलान किया, जिन्होंने भोजशाला आंदोलन में अपनी जान गंवाई थी। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने धार को ज्ञान और पर्यटन का विश्वस्तरीय केंद्र बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं।
धार की सांस्कृतिक विरासत का पुनरुद्धार और नई परियोजनाएं
मुख्यमंत्री ने धार की सांस्कृतिक धरोहर को पुनर्जीवित करने के लिए दो प्रमुख परियोजनाओं की घोषणा की। इनमें मां सरस्वती लोक और राजा भोज रिसर्च सेंटर शामिल हैं। उन्होंने बताया कि देवी सरस्वती को समर्पित एक भव्य आध्यात्मिक गलियारा विकसित किया जाएगा, जो उज्जैन के महाकाल लोक की तर्ज पर बन सकता है। साथ ही, परमार वंश के महान राजा भोज के साहित्य, वास्तुकला और तकनीकी योगदान पर शोध के लिए अत्याधुनिक संस्थान की स्थापना की जाएगी।
शहीदों को श्रद्धांजलि और राजा भोज की विरासत का सम्मान
सीएम मोहन यादव ने भोजशाला आंदोलन में प्राण न्यौछावर करने वाले तीन शहीदों—पंत सिंह, अंतर सिंह और लक्ष्मण सिंह—के परिवारों को सम्मानित करते हुए कहा कि इन बलिदानियों की वजह से ही आज यह सफलता मिली है। उन्होंने इन परिवारों को पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता का भी वादा किया। साथ ही, उन्होंने राजा भोज की तकनीकी कौशल की प्रशंसा करते हुए बताया कि राजा भोज ने विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग बनवाया था और बिना नदी का मार्ग रोके भोपाल तालाब का निर्माण किया था। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राजा भोज कवियों को सोने की ईंटें इनाम में देते थे, जो हमारे समृद्ध अतीत का प्रमाण है।











