मध्य प्रदेश में सीएम हेल्पलाइन का फर्जीवाड़ा उजागर
मध्य प्रदेश के मऊगंज में जनता की शिकायतों के समाधान के लिए स्थापित सीएम हेल्पलाइन का दुरुपयोग किया गया है, जहां पुलिसकर्मियों ने अपने रैंकिंग सुधारने के लिए फर्जी शिकायतें दर्ज कराई। इस घपलेबाजी का खुलासा होने के बाद एक आरक्षक को निलंबित कर दिया गया है, लेकिन सवाल उठता है कि क्या इस पूरे खेल का जिम्मेदार सिर्फ एक सिपाही है या फिर यह एक संगठित नेटवर्क का हिस्सा है।
सिस्टम में चल रहा था संगठित फर्जीवाड़ा
आरोप है कि मऊगंज में सीएम हेल्पलाइन को जनता की आवाज नहीं, बल्कि रैंकिंग बढ़ाने का उपकरण बना दिया गया था। शिकायतकर्ता और समाधानकर्ता दोनों ही एक ही व्यक्ति थे, और शिकायतें दर्ज होने के बाद उन्हें तुरंत ही निपटारा दिखाया जाता था। जब शिकायतों का विश्लेषण किया गया, तो पता चला कि एक ही नाम से कई शिकायतें दर्ज की गई थीं, जिनमें से अधिकांश फर्जी थीं।
संबंधित शिकायतों का खेल और जांच
मामले की जांच में पता चला कि महज कुछ महीनों में 21 मोबाइल नंबरों से 233 शिकायतें दर्ज कराई गई थीं, जिनमें से अधिकांश खुद शिकायतकर्ता द्वारा ही दर्ज और समाधान दिखाया गया था। खास बात यह है कि एक ही दिन कई शिकायतें दर्ज हुईं और तुरंत ही उनका समाधान भी कर दिया गया। उदाहरण के तौर पर, सौरभ नामक व्यक्ति ने एक ही दिन में कई शिकायतें कीं, जिनमें से सभी का समाधान अगले ही दिन कर दिया गया।
इस पूरे मामले में मऊगंज थाना प्रभारी का नाम सामने आया, जिन्हें जांच के बाद पद से हटा दिया गया है। वहीं, एक कांस्टेबल विवेक यादव की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। वर्तमान में पुलिस महकमे का कहना है कि मामले की जांच जारी है और शुरुआती कार्रवाई के तहत आरक्षक को हटा दिया गया है।
यह फर्जीवाड़ा दर्शाता है कि रैंकिंग और आंकड़ों की होड़ में जनता का भरोसा दांव पर है। सवाल यह है कि क्या इस पूरे खेल के पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है या फिर यह सिर्फ एक सिपाही का अकेला कदम है। यदि जनता की आवाज सुनने और शिकायतों का सही समाधान करने का सिस्टम ही भ्रष्ट हो जाए, तो इससे जनता का भरोसा और सिस्टम की विश्वसनीयता दोनों ही प्रभावित होते हैं।











