दिल्ली-एनसीआर में भीषण गर्मी का कहर, पक्षियों की हालत गंभीर
दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में तेज धूप और लू के कारण वातावरण इतना गर्म हो गया है कि न केवल इंसान बल्कि आसमान के जीव भी संकट में फंस गए हैं। खासकर गुरुग्राम में इन दिनों मौसम की मार से पीड़ित, बीमार और लाचार पक्षियों की संख्या अचानक बढ़ गई है। शहर के प्रसिद्ध बर्ड रेस्क्यूअर, जिन्हें प्यार से ‘पक्षीराज’ कहा जाता है, के पास रोजाना बीस से पच्चीस बीमार पक्षी इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इस भीषण गर्मी ने बेजुबानों को बुरी तरह से झकझोर कर रख दिया है।
गर्मी के कारण पक्षियों में फैल रहे तीन खतरनाक रोग
गर्मी की इस जानलेवा मार से पक्षियों को तीन गंभीर बीमारियों ने घेर लिया है। गुरुग्राम के रेस्क्यू सेंटर के प्रमुख के अनुसार, अस्पताल पहुंच रहे पक्षियों में सबसे अधिक हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन, पैरालिसिस और चेचक के लक्षण देखे जा रहे हैं। हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन के कारण, पानी की कमी और तेज धूप के चलते पक्षी उड़ते-उड़ते ही बेहोश होकर गिर रहे हैं।
इसके अलावा, शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स की भारी कमी और अत्यधिक तापमान के कारण कई पक्षियों के पंख और पैर काम करना बंद कर चुके हैं। चेचक, जो फंगल और वायरल संक्रमण के रूप में फैल रहा है, पक्षियों की त्वचा और आंखों को प्रभावित कर रहा है। रोजाना बीस से पच्चीस पक्षी गंभीर हालत में पहुंच रहे हैं, जिनमें कबूतर, चील, तोते और गौरैया शामिल हैं। यदि इन्हें समय पर ओआरएस या ग्लूकोज नहीं दिया गया, तो इनकी जान खतरे में पड़ सकती है।
गुरुग्राम का बर्ड रेस्क्यू सेंटर अब बन गया आईसीयू जैसा
गुरुग्राम का यह पक्षी रेस्क्यू सेंटर इन दिनों किसी मल्टी-स्पेशलिटी हॉस्पिटल के आईसीयू की तरह दिख रहा है। यहां लाचार पक्षियों को न केवल ग्लूकोज और ठंडी ड्रिप्स दी जा रही हैं, बल्कि उनके रहने के लिए विशेष इंतजाम भी किए गए हैं ताकि उन्हें हीट वेव (लू) से सुरक्षित रखा जा सके। चेचक से पीड़ित पक्षियों को आइसोलेशन वार्ड में रखकर उनका विशेष एंटी-वायरल ट्रीटमेंट किया जा रहा है।
मौसम की इस गंभीर मार से निपटने के लिए शहरवासी भी छोटी-छोटी कोशिशें कर सकते हैं। ‘पक्षीराज’ और बर्ड लवर्स ने लोगों से अपील की है कि वे अपने घरों की छतों और बालकनी में ताजा पानी रखें, मिट्टी के बर्तनों में पानी डालें, और यदि कोई पक्षी सुस्त या बीमार दिखे तो उसे तुरंत छांव में ले जाकर पानी पिलाएं। साथ ही, अपने आसपास के क्षेत्र में पक्षियों के लिए छायादार जगह या कृत्रिम घोंसले बनाना भी मददगार हो सकता है। इन आसान कदमों से हम इन बेजुबानों की जान बचाने में मदद कर सकते हैं।











